आतंकी फंडिंग केस में शब्बीर शाह की 6 साल से अधिक की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, NIA से मांगा जवाब

 सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह की छह साल से अधिक लंबी हिरासत को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जवाब मांगा है। अदालत ने सवाल उठाया कि आखिर उनके इतने लंबे समय तक जेल में रहने का आधार क्या है और एजेंसी किन तथ्यों के आधार पर इसे उचित ठहरा रही है।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा:

“हमें ऐसे लोगों के लिए कोई सहानुभूति नहीं है, जो देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त होते हैं, लेकिन हिरासत को उचित ठहराने के लिए ठोस तथ्य भी होने चाहिए। हम आंखें मूंद नहीं सकते।”

NIA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने अदालत से समय मांगा और कहा कि कुछ दस्तावेज प्रवर्तन निदेशालय (ED) या राज्य पुलिस के पास हो सकते हैं।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी 2026 को तय की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कोलिन गोंसाल्विस, जो शब्बीर शाह की ओर से पेश हुए, ने कहा कि शाह ने कश्मीर मुद्दे पर पांच प्रधानमंत्रियों से बात की और कभी हिंसा या आतंक का समर्थन नहीं किया।

“मैंने न कभी पत्थर फेंका, न किसी को भड़काया। मैं पांच प्रधानमंत्रियों से मिला — उन्होंने इसलिए बुलाया क्योंकि वो जानते थे कि मैं आतंकवादी नहीं हूं।”

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गोंसाल्विस ने कहा कि शाह की कुल जेल अवधि करीब 39 साल है और वे कभी भी सेना या सरकार के खिलाफ कोई हिंसक बयान नहीं देते थे। उनका कहना था कि शाह केवल कश्मीर के लोगों की भावनाएं प्रकट करते थे।

“जब मैंने आज़ादी की बात की, तो उसका मतलब पाकिस्तान नहीं था। मैं केवल लोगों के दुख-दर्द की बात करता था।”

गोंसाल्विस ने अदालत से यह भी कहा कि शाह अब 74 वर्ष के हैं, और अगर उन्हें जमानत दी जाती है तो वे खुद को केवल अपने घर और बगीचे तक सीमित रखने को तैयार हैं।

NIA की ओर से लूथरा ने गोंसाल्विस के 39 साल के दावे को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि तिहाड़ जेल और कश्मीर के DG प्रिजन की रिपोर्ट के अनुसार शाह ने अब तक कुल मिलाकर करीब 8 साल ही जेल में बिताए हैं, और वर्तमान मामले में 5 साल 2 महीने।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि वर्तमान सुनवाई केवल 2019 से शुरू हुई मौजूदा हिरासत से जुड़ी है और पुराने मामलों को इसमें नहीं जोड़ा जा सकता।

NIA ने 2017 में एक आतंकी फंडिंग केस में शब्बीर शाह समेत 12 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की थी। आरोप है कि:

  • उन्होंने कश्मीर में अलगाववाद को बढ़ावा दिया,
  • पत्थरबाज़ी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए फंड जुटाया,
  • हवाला और LoC ट्रेड के ज़रिए पैसे मंगाए,
  • और इन पैसों का इस्तेमाल उपद्रव और आतंकी गतिविधियों के लिए किया।

शाह को 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 7 जुलाई 2023 को शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। अदालत ने कहा था कि उनके गंभीर आरोपों को देखते हुए उन्हें जमानत देने से गवाहों को प्रभावित करने और दोबारा अपराध में शामिल होने की आशंका बनी रहती है।

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हाईकोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि शाह “जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी” के अध्यक्ष हैं — जिसे एक गैरकानूनी संगठन घोषित किया गया है — और उनके खिलाफ 24 आपराधिक मामले लंबित हैं, जिनमें कई देशद्रोह और अलगाववाद से जुड़े हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया कि अगर 10 फरवरी को सुनवाई पूरी नहीं होती है, तो अदालत अंतरिम राहत पर विचार कर सकती है। अदालत ने इससे पहले 4 सितंबर 2025 को भी अंतरिम जमानत से इनकार करते हुए NIA से जवाब तलब किया था।

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