दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) के शुक्रवार को कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। हालांकि, कोर्ट ने दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा मांग रहे दो पत्रकारों की याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन सांबरे ने CJP के प्रदर्शन से जुड़ी याचिका पर दोपहर 2:30 बजे विचार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि पहले सुप्रीम कोर्ट में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में हुए प्रदर्शनों से संबंधित मामलों की सुनवाई हो जाने दी जाए। वहीं, दोनों पत्रकारों की याचिकाओं को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया।
कनॉट प्लेस में प्रदर्शन से व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई
सीनियर एडवोकेट सचिन पुरी ने CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन को रोकने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया। उन्होंने दलील दी कि दशहरे के सप्ताहांत के दौरान कनॉट प्लेस में प्रदर्शन होने से लोगों को परेशानी हो सकती है और वहां की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को लोगों से कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में एकत्र होने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि इस प्रदर्शन के जरिए यह संदेश दिया जाएगा कि तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है।
प्रदर्शन का यह ऐलान CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की एहतियातन गिरफ्तारी के बाद किया गया था।
दोनों नेताओं पर आरोप है कि मंगलवार सुबह उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल में प्रवेश किया और वहां तिरंगा फहराया।
गुरुवार को जब इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन सांबरे के सामने रखा गया, तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में SIR विरोधी प्रदर्शनों से संबंधित मामलों की सुनवाई का उल्लेख किया।
उन्होंने वकील से कहा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी होने के बाद दोपहर 2:30 बजे फिर से मामला उनके सामने रखा जाए। इसके बाद हाईकोर्ट याचिका पर विचार करेगा।
यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद एसीपी ने दर्ज कराया SC/ST एक्ट के तहत मामला
इसी दौरान दो पत्रकारों की ओर से पेश वकील ने गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग वाली दो आपराधिक रिट याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया।
दोनों याचिकाएं दिल्ली पुलिस के एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज एक ही एफआईआर से संबंधित हैं।
यह विवाद 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शन से जुड़ा है। उस दौरान तीन महिला पत्रकारों ने एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और धक्का-मुक्की करने के आरोप लगाए थे।
इसके बाद एसीपी भगत ने एक महिला पत्रकार पर जाति के आधार पर भेदभाव करने का आरोप लगाया और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज कराई।
पत्रकारों की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि दोनों याचिकाकर्ता पत्रकार हैं और उनके खिलाफ शिकायत करने वाला व्यक्ति दिल्ली पुलिस में एसीपी के पद पर तैनात है।
वकील ने यह भी बताया कि एसीपी की शिकायत एक पत्रकार द्वारा यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बाद सामने आई है।
उन्होंने दलील दी कि दोनों पत्रकारों को गिरफ्तारी की गंभीर आशंका है। इसी कारण उन्होंने कोर्ट से तत्काल सुनवाई कर गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की मांग की है।
हालांकि, कार्यवाहक चीफ जस्टिस नितिन सांबरे ने गुरुवार को इन याचिकाओं पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। उन्होंने दोनों याचिकाओं को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।

