दिल्ली हाईकोर्ट ने झूठे AI वीडियो को हटाने का आदेश दिया, जिसमें ताज लेक पैलेस उदयपुर के कर्मचारियों पर मेहमानों को ज़हर देने का आरोप लगाया गया था

 दिल्ली हाईकोर्ट ने एक एआई (AI) जनरेटेड वीडियो को हटाने का निर्देश दिया है, जिसमें झूठा दावा किया गया था कि उदयपुर के होटल ताज लेक पैलेस के कर्मचारियों ने मेहमानों को ज़हर दिया था। अदालत ने कहा कि यह वीडियो होटल की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला और भ्रामक है।

 न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने 15 अक्टूबर को पारित अपने अंतरिम आदेश में कहा कि अदालत का प्रथम दृष्टया मत है कि वीडियो की सामग्री झूठी है। उन्होंने कहा, “यह अदालत वादी (इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड) के इस तर्क में मेरिट पाती है कि इस तरह के झूठे वीडियो का प्रसार वादी की प्रतिष्ठा का सीधा उल्लंघन करता है और ताज लेक पैलेस, उदयपुर की छवि को सार्वजनिक रूप से गलत रूप में प्रस्तुत करता है।”

यह आदेश टाटा समूह की इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड (IHCL) द्वारा दायर वाद पर पारित किया गया, जो ताज ब्रांड के होटलों का संचालन करती है। कंपनी ने अदालत से संपर्क किया था जब इंस्टाग्राम पेज ‘Travelagio’ ने एक “भ्रामक और झूठा एआई-जनरेटेड डीपफेक वीडियो” पोस्ट किया था जिसका शीर्षक था – “Staff poisoned wealthy guests for 6 months…”

वीडियो में दावा किया गया कि वर्ष 2018 में ताज लेक पैलेस में लक्जरी पर्यटकों की हत्या ज़हर देकर की गई थी और इस घटना को अधिकारियों ने छिपा दिया। याचिका में कहा गया कि वीडियो में ज़हर के रूप में फॉक्सग्लोव (डिजिटालिस) नामक पौधे का ज़िक्र किया गया है, जबकि यह पौधा उदयपुर में उग ही नहीं सकता।

कंपनी ने बताया कि यह वीडियो 20,000 से अधिक बार देखा गया और सैकड़ों बार शेयर व कमेंट किया गया। वीडियो की रिपोर्ट नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की गई थी, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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IHCL ने अदालत को यह भी बताया कि उसका होटल ताज लेक पैलेस को हाल ही में ग्लोबल मिशेलिन कीज सेलेक्शन में तीन मिशेलिन कीज से सम्मानित किया गया था — जो विश्व के सबसे उत्कृष्ट और विशिष्ट होटलों को दी जाने वाली मान्यता है — और यह झूठा वीडियो उसी के तुरंत बाद प्रकाशित किया गया।

 अदालत ने न केवल वीडियो को हटाने का आदेश दिया, बल्कि जॉन डो प्रतिवादी को यह भी निर्देश दिया कि वह इस वीडियो या ताज ब्रांड को बदनाम करने वाली किसी अन्य सामग्री को किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या वेबसाइट पर साझा न करे।

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साथ ही, अदालत ने Meta Platforms Inc. को भी यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि उक्त वीडियो दोबारा अपलोड या शेयर किए जाने पर उसे तुरंत हटाया जाए।

अदालत ने कहा कि इस तरह के एआई-आधारित झूठे और भ्रामक कंटेंट से ब्रांड की साख और उपभोक्ता विश्वास को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए ऐसी सामग्री के खिलाफ तत्काल कदम उठाना ज़रूरी है।

मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च, 2026 को होगी।

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