बस हादसे में मज़दूर की मौत: MSRTC को परिजनों को ₹13.95 लाख मुआवज़ा देने का आदेश

मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) ने महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) को आदेश दिया है कि वह 2021 में बस दुर्घटना में मारे गए 53 वर्षीय मज़दूर के परिजनों को ₹13.95 लाख मुआवज़ा अदा करे।

न्यायाधिकरण के सदस्य आर. वी. मोहिटे ने 26 अगस्त को पारित आदेश (जो सोमवार को उपलब्ध हुआ) में कहा कि दुर्घटना के लिए केवल बस चालक ज़िम्मेदार है और निगम का यह तर्क अस्वीकार कर दिया कि मृतक लापरवाह था।

मृतक की पहचान शिवाजी गणपति इरुले के रूप में हुई। वह 9 अक्टूबर 2021 को ठाणे के घोड़बंदर रोड पर गैमुख नाका के पास सड़क किनारे चल रहे थे। इसी दौरान MSRTC की एक बस तेज़ रफ़्तार से आई, जिसकी बायीं तरफ़ का डिक्की दरवाज़ा खुला हुआ था। दरवाज़ा इरुले को ज़ोर से लगा और वह ज़मीन पर गिर पड़े।

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उन्हें पहले एक निजी अस्पताल और बाद में ठाणे सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती से पहले ही मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद कासारवडवली पुलिस ने बस चालक के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया।

MSRTC की आपत्तियों को ख़ारिज करते हुए न्यायाधिकरण ने कहा:

“बस चालक डिक्की का दरवाज़ा खुला रखकर लापरवाह प्रतीत होता है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिससे यह साबित हो कि मृतक की कोई लापरवाही रही हो।”

न्यायाधिकरण ने यह भी कहा कि डिक्की का दरवाज़ा सुरक्षित रूप से बंद है या नहीं, इसकी ज़िम्मेदारी बस चालक और कंडक्टर दोनों की थी।

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परिजनों ने दावा किया था कि मृतक मज़दूरी कर ₹20,000 प्रतिमाह कमाता था, लेकिन प्रमाण के अभाव में न्यायाधिकरण ने उसकी अनुमानित आय ₹13,000 प्रतिमाह मानी। इसके आधार पर कुल ₹13,95,400 का मुआवज़ा तय किया गया, जिसमें आर्थिक और गैर-आर्थिक दोनों प्रकार की क्षतिपूर्ति शामिल है।

न्यायाधिकरण ने आदेश दिया कि MSRTC एक महीने के भीतर यह राशि जमा करे और उस पर याचिका दायर करने की तारीख से 9% वार्षिक ब्याज भी अदा करे।

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मुआवज़े का बंटवारा इस प्रकार होगा:

  • मृतक की पत्नी और माँ को ₹4.97 लाख प्रत्येक (जिसमें से कुछ हिस्सा तीन साल के लिए फिक्स्ड डिपॉज़िट में रहेगा)।
  • मृतक के चारों बच्चों को ₹1-1 लाख दिए जाएंगे।

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