सुप्रीम कोर्ट ने जारी की रिकॉर्ड संरक्षण और नष्ट करने के लिए 2025 की नई गाइडलाइंस

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासनिक रिकॉर्ड के प्रबंधन के लिए “रिकॉर्ड के संरक्षण और विनष्ट करने हेतु दिशानिर्देश – 2025” जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश रजिस्ट्री शाखाओं में गैर-न्यायिक दस्तावेज़ों के संग्रह, संरक्षण और नष्ट करने की प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और दक्षता लाने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

पृष्ठभूमि और उद्देश्य

जहाँ न्यायिक रिकॉर्ड को सुप्रीम कोर्ट नियमावली, 2013 के ऑर्डर LVI और 2017 की “हैंडबुक ऑन प्रैक्टिस एंड ऑफिस प्रोसीजर” के तहत संरक्षित किया जाता है, वहीं प्रशासनिक रिकॉर्ड के लिए अब तक कोई स्पष्ट नीति नहीं थी। इसके कारण अलग-अलग शाखाओं में रिकॉर्ड प्रबंधन की प्रक्रिया असंगत बनी हुई थी।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी. आर. गवई ने अपने संदेश में कहा कि बढ़ते प्रशासनिक कार्यभार को ध्यान में रखते हुए एक व्यवस्थित रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई, जिससे पारदर्शिता और कार्यकुशलता सुनिश्चित हो सके।

दिशानिर्देशों की मुख्य विशेषताएं

फाइल नंबर F.No.4/2025/SCR के तहत स्वीकृत इन दिशानिर्देशों में विभिन्न श्रेणियों के रिकॉर्ड के संरक्षण और विनष्ट करने की अवधि तय की गई है। प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:

  • स्थायी संरक्षण: मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों द्वारा हस्ताक्षरित मूल प्रस्तुतिकरण नोट्स, नीतिगत फाइलें, कार्यालय आदेश और न्यायिक नियुक्तियों से संबंधित रिकॉर्ड स्थायी रूप से संरक्षित किए जाएंगे।
  • समय-सीमित संरक्षण: डाक, उपस्थिति रजिस्टर और आकस्मिक अवकाश जैसे दस्तावेज़ केवल एक वर्ष के लिए रखे जाएंगे, जबकि संसदीय प्रश्नों से जुड़े फाइलें तीन वर्षों तक रखी जाएंगी।
  • ऑडिट आधारित विनष्ट नीति: वित्तीय रिकॉर्ड, बिल, प्रतिपूर्ति आदि से जुड़े दस्तावेज़ ऑडिट पूरा होने के बाद ही नष्ट किए जाएंगे।
  • स्कैन दस्तावेज़ों का अपवाद: किसी विशेष परिस्थिति में स्कैन की गई प्रतियों को अधिक समय तक संरक्षित रखने की अनुमति रजिस्ट्रार की अनुमति से दी जा सकती है।
READ ALSO  आपराधिक पृष्ठभूमि के बारे में तथ्य छिपाकर अनुशासित बलों में रोजगार पाने का प्रयास करने वाले व्यक्ति के लिए कोई जगह नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

शाखा-वार विवरण

  • एडमिन-I से III शाखा: कर्मचारियों की व्यक्तिगत फाइलें, पदोन्नति की रिपोर्टें, एमएसीपी दस्तावेज़, प्रोबेशन से जुड़े रिकॉर्ड आदि 3 से 10 वर्षों तक रखे जाएंगे, जबकि सेवा समाप्ति के बाद कुछ को नष्ट किया जाएगा।
  • एडमिन-J शाखा: माननीय जजों से संबंधित सभी दस्तावेज़ जैसे मोबाइल बिल, सुरक्षा व्यवस्था, आवासीय सुविधाएं, अंतरराष्ट्रीय यात्राएं, सेवानिवृत्ति आदि को स्थायी रूप से संरक्षित किया जाएगा या पांच वर्षों तक रखा जाएगा।
  • विजिलेंस सेल: अनुशासनात्मक कार्रवाई, संपत्ति विवरण और शिकायतों से संबंधित रिकॉर्ड सेवा समाप्ति या मामले के निपटारे तक संरक्षित रहेंगे।
  • मेडिकल और प्रोटोकॉल शाखाएं: चिकित्सा प्रतिपूर्ति, सीजीएचएस, अस्पतालों से समझौते, दौरे और सम्मेलन संबंधी रिकॉर्ड निर्धारित अवधि या स्थायी रूप से संरक्षित किए जाएंगे।
  • भर्ती शाखा: परीक्षा से जुड़े आवेदन पत्र, उत्तर पुस्तिकाएं, रिपोर्ट आदि 1 से 6 वर्षों तक रखे जाएंगे, जबकि लॉ क्लर्क और संविदा कर्मियों के रिकॉर्ड को कार्यकाल समाप्ति के 3 वर्षों तक संरक्षित किया जाएगा।
READ ALSO  2005 में श्रमजीवी एक्सप्रेस ट्रेन विस्फोट में दो को मौत की सज़ा

क्रियान्वयन की प्रक्रिया

रिकॉर्ड नष्ट करने की प्रक्रिया गर्मी की छुट्टियों या आंशिक कार्यदिवसों के दौरान संपन्न की जाएगी। प्रत्येक विनष्टि क्रिया के लिए संबंधित रजिस्ट्रार की अनुमति आवश्यक होगी। यदि किसी दस्तावेज़ से संबंधित कोई न्यायिक या ऑडिट मामला लंबित है, तो विनष्टि नहीं की जाएगी।

तैयारी में योगदान

इन दिशानिर्देशों का प्रारूप सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार श्री प्रदीप वाय. लाडेकर ने तैयार किया है, जिन्हें सचिवालय प्रमुख श्री भरत पराशर और विशेष कार्याधिकारी श्री एस. सी. मुनघाटे का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। मुख्य न्यायाधीश गवई ने उनके प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इन दिशानिर्देशों की वास्तविक उपयोगिता तभी सिद्ध होगी जब इनका अनुशासनात्मक और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

READ ALSO  अस्पताल के खिलाफ अपील खारिज करते हुए एनसीडीआरसी ने कहा कि मरीज की हर मौत को चिकित्सकीय लापरवाही से हुई मौत नहीं माना जा सकता
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles