जयपुर पोलो ग्राउंड मामला: वकीलों की हड़ताल के कारण दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई टली, अब 12 अगस्त को होगी अगली तारीख

दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को इंडियन पोलो एसोसिएशन (आईपीए) की उस याचिका पर सुनवाई 12 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी, जिसमें उसने 15.20 एकड़ के जयपुर पोलो ग्राउंड से अपनी बेदखली को चुनौती दी है। स्थानीय वकीलों की हड़ताल के कारण कोर्ट की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी।

जस्टिस हरीश वैजनाथन शंकर के समक्ष होने वाली इस सुनवाई को वकीलों के काम से दूर रहने के कारण टालना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ (फुल कोर्ट) ने जिला अदालतों के आर्थिक क्षेत्राधिकार (पैक्यूनियरी ज्यूरिस्डिक्शन) की सीमा को 2 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का समर्थन किया है, जिसके विरोध में वकील न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर रहे हैं।

जुलाई में सुनवाई करने से हाईकोर्ट का इनकार

मंगलवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पोलो एसोसिएशन और केंद्र सरकार, दोनों के कानूनी प्रतिनिधियों ने अदालत से कोई जल्द की तारीख देने का अनुरोध किया। एसोसिएशन के वरिष्ठ वकील ने पीठ से मामले को जुलाई में ही सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। उन्होंने दलील दी कि निचली अदालत (सत्र न्यायालय) में इस मुख्य मामले की सुनवाई पहले से ही 23 जुलाई को तय है।

हालांकि, जस्टिस शंकर ने जुलाई की तारीख देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन इस संबंध में सत्र न्यायालय को सूचित कर सकता है। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि वकीलों द्वारा अचानक काम बंद किए जाने से अदालतों की पूरी योजना और मामलों के प्रबंधन का शेड्यूल गड़बड़ा जाता है। उन्होंने कहा कि वे मंगलवार को ही सुनवाई के लिए तैयार थे, लेकिन वकीलों की अनुपलब्धता के कारण इसे आगे बढ़ाना पड़ा।

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बेदखली के आदेश के खिलाफ कानूनी लड़ाई

इंडियन पोलो एसोसिएशन ने निचली सत्र न्यायालय के 18 जून के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत एसोसिएशन की अंतरिम अर्जी खारिज कर दी गई थी। सत्र न्यायालय, जो सरकारी परिसर (अनाधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम के तहत अपीलीय प्राधिकरण है, ने बेदखली के सरकारी आदेश पर रोक लगाने, मैदान का कब्जा वापस दिलाने और जमीन पर किसी भी प्रकार के बदलाव, खुदाई या तोड़फोड़ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। एसोसिएशन का दावा है कि सत्र न्यायालय द्वारा अंतरिम राहत न देना स्पष्ट रूप से त्रुटिपूर्ण था।

पोलो ग्राउंड की घास और मैदान को नुकसान की आशंका

भूमि एवं विकास कार्यालय के अधिकारियों ने बीते 13 जून को नई दिल्ली के रेस कोर्स क्षेत्र में स्थित इस प्रतिष्ठित पोलो ग्राउंड का भौतिक कब्जा अपने हाथ में ले लिया था।

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हाईकोर्ट में दायर याचिका में स्पोर्ट्स एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि अपील लंबित होने के बावजूद अधिकारियों ने जमीन पर खुदाई और घास उखाड़ने जैसे ऐसे बदलाव शुरू कर दिए हैं, जिन्हें दोबारा ठीक करना मुश्किल होगा। एसोसिएशन का कहना है कि जयपुर पोलो ग्राउंड कोई साधारण खाली जमीन नहीं है, बल्कि एक विशेष खेल मैदान है। इसके रखरखाव के लिए कुशल कर्मियों द्वारा नियमित रूप से सिंचाई, घास की कटाई, समतलीकरण, मिट्टी की हवादार (एरिएशन) और रोलिंग जैसी वैज्ञानिक प्रक्रियाओं की जरूरत होती है।

एसोसिएशन ने सचेत किया कि बिना तकनीकी विशेषज्ञ की देखरेख के की जाने वाली किसी भी खुदाई या निर्माण कार्य से मैदान को ऐसा स्थाई नुकसान पहुंचेगा जिसे सुधारा नहीं जा सकेगा। दूसरी ओर, केंद्र सरकार के वकील ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस समय मैदान पर कोई भौतिक बदलाव या तोड़फोड़ नहीं की जा रही है, बल्कि अधिकारी केवल सीमाओं के निर्धारण (सीमांकन) का काम कर रहे हैं।

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गौरतलब है कि केंद्र सरकार इस खेल मैदान और इसके पास स्थित दिल्ली जिमखाना क्लब जैसी प्रमुख संपत्तियों को सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अपने नियंत्रण में लेने की योजना पर काम कर रही है।

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