हाल के एक फैसले में, कर्नाटक हाईकोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत दो व्यक्तियों के खिलाफ शुरू किए गए अभियोजन को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति एम नागप्रसन्ना की अध्यक्षता वाले मामले में याचिकाकर्ताओं के खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए घर में अतिक्रमण और लगातार उत्पीड़न के आरोप
