मुर्शिदाबाद हिंसा: NIA जांच पर रोक से इनकार के खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसने मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा के मामलों की NIA जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस मामले में “संतुलित दृष्टिकोण” अपनाया है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा दायर उस अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 26 फरवरी के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने उस आदेश में NIA की जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को NIA की जांच को लेकर कोई आपत्ति है तो वह अपनी शिकायतें हाई कोर्ट के समक्ष उठा सकती है। अदालत ने यह भी कहा कि हाई कोर्ट केंद्र सरकार के उस फैसले की वैधता की भी जांच कर सकता है, जिसके तहत इस मामले की जांच NIA को सौंपी गई थी।

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सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने 11 फरवरी को दिए गए अपने एक पूर्व आदेश का भी उल्लेख किया। उस आदेश में अदालत ने NIA को निर्देश दिया था कि वह हाई कोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल कर यह बताए कि मुर्शिदाबाद हिंसा के मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धाराएं लागू करने का आधार क्या है।

NIA ने इस मामले में UAPA की धारा 15(1)(a) के तहत मामला दर्ज किया है, जो आतंकवादी कृत्यों से संबंधित है। यह प्रावधान उन मामलों में लागू होता है जहां किसी कृत्य का उद्देश्य देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालना या लोगों में दहशत फैलाना हो। साथ ही इसमें बम, विस्फोटक पदार्थ, आग लगाने वाले पदार्थ, हथियार या अन्य घातक साधनों के इस्तेमाल जैसे तत्व शामिल होते हैं।

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अदालत ने एजेंसी से पूछा था कि मुर्शिदाबाद के बेलडांगा क्षेत्र में हुई हिंसा में इस प्रावधान को लागू करने का आधार क्या है। NIA की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने एजेंसी के निर्णय का बचाव करते हुए कहा कि घटनाओं में घातक हथियारों का इस्तेमाल हुआ था और बेलडांगा क्षेत्र की बांग्लादेश सीमा के निकटता भी एक महत्वपूर्ण पहलू है।

गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को इस मामले की जांच NIA को सौंप दी थी। इससे पहले मुर्शिदाबाद जिले में लगातार हिंसा और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं।

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20 जनवरी को कलकत्ता हाई कोर्ट ने जिले में बार-बार हो रही हिंसा पर चिंता जताते हुए पुलिस और प्रशासन को शांति व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए थे।

घटनाओं की शुरुआत 16 जनवरी को हुई, जब झारखंड में काम कर रहे बेलडांगा के एक प्रवासी मजदूर की मौत के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को जाम कर दिया था। इसके अगले दिन 17 जनवरी को बिहार में काम कर रहे मुर्शिदाबाद के एक अन्य प्रवासी मजदूर के साथ कथित अभद्रता के विरोध में भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद NIA की जांच जारी रहेगी, जबकि पश्चिम बंगाल सरकार को अपनी आपत्तियां कलकत्ता हाई कोर्ट के समक्ष रखने का विकल्प दिया गया है।

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