अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम की मांग तेज, बनारस घटना पर बार काउंसिल ने सरकार से की मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की

उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने बनारस में अधिवक्ताओं के साथ हुए कथित पुलिस दुर्व्यवहार और उत्पीड़न की हालिया घटनाओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार से उच्च-स्तरीय मजिस्ट्रेटी जांच की मांग की है। काउंसिल के सदस्य एवं पूर्व अध्यक्ष परेश मिश्र ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक पत्र में, प्रदेश में तत्काल ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ लागू करने का आह्वान किया है। साथ ही, यह चेतावनी भी दी है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेशभर के वकील एक बड़ा आंदोलन करने को विवश होंगे।

18 सितंबर, 2025 को लिखे गए इस पत्र में, बनारस में पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई को “न्याय व्यवस्था की गरिमा के विरुद्ध, अत्यंत गंभीर और निंदनीय” बताया गया है। पत्र में इस बात पर जोर दिया गया है कि कानून के शासन को बनाए रखने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और पुलिस अधिकारियों द्वारा बार-बार किया जाने वाला दुर्व्यवहार “अधिवक्ताओं की स्वतंत्रता और सम्मान पर सीधा हमला” है।

काउंसिल ने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी प्रयागराज और हापुड़ जैसी जगहों पर अधिवक्ताओं को पुलिस के दुर्व्यवहार, हमले और उत्पीड़न का सामना करना पड़ा है। पत्र के अनुसार, इन लगातार हो रही घटनाओं से पूरे प्रदेश के अधिवक्ता समाज में “असुरक्षा और आक्रोश की भावना गहराती जा रही है।”

READ ALSO  'गाली देना' अश्लीलता नहीं; सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "बास्टर्ड" जैसे शब्दों का इस्तेमाल अश्लीलता की श्रेणी में नहीं आता

सरकार के समक्ष अपनी प्रस्तुति में, बार काउंसिल ने पांच प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. बनारस की घटना की उच्च-स्तरीय मजिस्ट्रेटी जांच कराई जाए।
  2. दोषी पाए गए पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो।
  3. अधिवक्ताओं की गरिमा, सम्मान और सुरक्षा की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
  4. अधिवक्ताओं को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए उत्तर प्रदेश में तत्काल ‘अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम’ लागू किया जाए।
  5. भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
READ ALSO  भोजशाला विवाद: जैन मंदिर व गुरुकुल होने के दावे वाली याचिका पर एमपी हाईकोर्ट ने मांगा जवाब, 2 अप्रैल को अगली सुनवाई

पत्र का समापन एक स्पष्ट चेतावनी के साथ होता है, जिसमें कहा गया है, “यदि इन मांगों पर तत्काल और ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरा अधिवक्ता समुदाय एक बड़ा प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होगा।” काउंसिल ने मुख्यमंत्री से इस मामले में संवेदनशीलता दिखाने का आग्रह करते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि कानूनी समुदाय अपने अधिकारों की रक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के लिए तैयार है।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles