दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की कस्टोडियल डेथ मामले में 10 वर्ष की सजा पाए जयदीप सेंगर की चिकित्सा आधार पर सजा निलंबन याचिका पर सुनवाई करते हुए एम्स, नई दिल्ली के निदेशक को उनका चिकित्सकीय परीक्षण कराने हेतु मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंद्र दूडे़जा की पीठ ने कहा कि याची की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति का निर्धारण करने के लिए स्वतंत्र चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक है। अदालत ने 24 फरवरी को यह आदेश पारित किया।
पीठ ने कहा कि चिकित्सा आधार पर सजा निलंबन के मामलों में न्यायालय को “विश्वसनीय और वस्तुनिष्ठ चिकित्सकीय राय तथा दस्तावेजों” के आधार पर निर्णय करना चाहिए। अदालत ने आदेश में कहा:
“चिकित्सा आधार पर सजा निलंबन से संबंधित मामलों में न्यायालय को विश्वसनीय और वस्तुनिष्ठ चिकित्सकीय राय एवं दस्तावेजों से मार्गदर्शित होना चाहिए। वर्तमान मामले में इस न्यायालय का मत है कि याची की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति जानने के लिए विधिवत गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा स्वतंत्र चिकित्सकीय परीक्षण आवश्यक है। तदनुसार एम्स, नई दिल्ली के निदेशक को निर्देश दिया जाता है कि वे याची की वर्तमान चिकित्सा स्थिति की जांच हेतु मेडिकल बोर्ड गठित करें।”
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दोषी द्वारा प्रस्तुत चिकित्सा दस्तावेज जाली हैं।
मामले को 2 मार्च के लिए सूचीबद्ध करते हुए अदालत ने मेडिकल बोर्ड से यह रिपोर्ट देने को कहा:
- क्या जयदीप सेंगर कैंसर या किसी अन्य जानलेवा बीमारी से ग्रस्त हैं,
- यदि हाँ, तो उसकी अवस्था क्या है, और
- क्या जेल अस्पताल में या सरकारी अस्पताल में पुलिस सुरक्षा के साथ ले जाकर पर्याप्त उपचार संभव है।
मृतक की पुत्री की ओर से भी अंतरिम राहत का विरोध करते हुए आशंका व्यक्त की गई कि रिहा होने पर सेंगर स्वतंत्रता का दुरुपयोग कर सकते हैं।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि जयदीप सेंगर को 3 जुलाई 2024 को चिकित्सा आधार पर दो माह की अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसे अंतिम बार अप्रैल 2025 में बढ़ाया गया था। 19 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट ने उन्हें जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।
जयदीप सेंगर, पूर्व भाजपा नेता कुलदीप सेंगर के भाई हैं। कुलदीप सेंगर को उन्नाव की नाबालिग पीड़िता के अपहरण और बलात्कार के मामले में 20 दिसंबर 2019 को शेष जीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
उन्नाव कस्टोडियल डेथ मामले में 13 मार्च 2020 को ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सेंगर और जयदीप सेंगर को 10 वर्ष के कठोर कारावास और ₹10 लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। पीड़िता के पिता को आर्म्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल 2018 को पुलिस हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई थी। ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि “परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की हत्या” में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती।
ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दोषियों की अपीलें दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित हैं।

