चुनाव याचिका अनिवार्य रूप से एक ट्रायल है, साक्ष्यों की जांच न्याय के लिए आवश्यक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि चुनाव याचिकाएं स्वभाविक रूप से एक ‘ट्रायल’ (मुकदमे) की तरह होती हैं, जहां गवाहों की जांच और साक्ष्यों का परीक्षण एक निष्पक्ष निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा है। कोर्ट ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी के उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव परिणामों को चुनौती देने वाली अपनी याचिका में गवाही और साक्ष्य प्रक्रिया को छोड़ने की मांग की थी।

यह कानूनी विवाद 27 फरवरी, 2024 को हुए राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। हिमाचल प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस पार्टी के पास बहुमत होने के बावजूद, उनके उम्मीदवार और दिग्गज वकील अभिषेक मनु सिंघवी भाजपा के हर्ष महाजन से चुनाव हार गए थे।

चुनाव के दौरान छह कांग्रेस विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों ने भाजपा के पक्ष में क्रॉस-वोटिंग की, जिससे दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले और मुकाबला बराबरी पर छूट गया। इस बराबरी के बाद ‘ड्रॉ ऑफ लॉट्स’ (पर्ची निकालकर) के जरिए विजेता का फैसला किया गया। चुनाव अधिकारी द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया के तहत, जिसकी पर्ची निकली उसे पराजित घोषित किया गया, जिसके परिणामस्वरूप महाजन की जीत और सिंघवी की हार हुई।

सिंघवी ने बाद में पर्ची निकालने के नियमों की व्याख्या को चुनौती देते हुए याचिका दायर की। उनका तर्क था कि जिस व्यक्ति का नाम पर्ची में निकले उसे विजेता के बजाय पराजित घोषित करना दुनिया भर की परंपराओं और सामान्य तर्क के खिलाफ है।

सुनवाई के दौरान, सिंघवी ने एक आवेदन दायर कर गवाहों की जांच और जिरह (cross-examination) की आवश्यकता को समाप्त करने का अनुरोध किया। उनके वकील ने दलील दी कि यह मामला मुख्य रूप से नियमों की कानूनी व्याख्या का है और इसमें लंबी गवाही की जरूरत नहीं है।

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दूसरी ओर, राज्यसभा सदस्य हर्ष महाजन के वकील विक्रांत ठाकुर ने इसका विरोध करते हुए कहा कि गवाहों की सूची कानूनी प्रक्रिया के अनुसार सही है। प्रतिवादी पक्ष का तर्क था कि सत्य को सामने लाने और न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूर्ण ट्रायल आवश्यक है।

हाईकोर्ट ने अवलोकन किया कि चुनाव याचिका की प्रकृति में विस्तृत ट्रायल प्रक्रिया शामिल होती है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि साक्ष्यों की जांच केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि चुनावी विवादों में न्याय के लिए एक अनिवार्य घटक है।

कोर्ट ने कहा कि हर्ष महाजन की ओर से पेश की गई गवाहों की सूची “उपयुक्त, वैध और कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप” थी। हाईकोर्ट ने पुष्टि की कि चुनाव ट्रायल में साक्ष्यों की बारीकी से जांच से बचा नहीं जा सकता, क्योंकि गवाहों की परीक्षा के माध्यम से ही तथ्यों की पुष्टि होती है और न्याय की शुचिता बनी रहती है।

सिंघवी के आवेदन को खारिज करते हुए, कोर्ट ने गवाहों की जांच और उनसे पूछताछ के साथ पूर्ण ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया है।

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कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए हर्ष महाजन ने कहा कि यह आदेश कांग्रेस नेतृत्व द्वारा “सच्चाई को दबाने” और निष्पक्ष ट्रायल से बचने की कोशिशों की विफलता है। उन्होंने एक बयान में कहा, “जब तथ्य कमजोर होते हैं, तो कांग्रेस सबूतों से भागती है, लेकिन हम सच्चाई के साथ मजबूती से खड़े हैं और हर मंच पर हर सवाल का सामना करने के लिए तैयार हैं।”

विक्रांत ठाकुर ने इस फैसले को महाजन के लिए एक “बड़ी राहत” बताया, जिससे अब यह मामला सभी तथ्यों और गवाहों की विस्तृत समीक्षा के साथ आगे बढ़ेगा।

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