टीएमसी ने ईडी की छापेमारी के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया, चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज जब्त करने का आरोप

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने शुक्रवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेजों और डाटा के “दुरुपयोग और प्रसार” पर रोक लगाने की मांग की है। यह छापेमारी राजनीतिक रणनीति सलाहकार फर्म I-PAC के कार्यालय और इसके प्रमुख के आवास पर की गई थी।

टीएमसी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि ईडी ने आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए पार्टी की गोपनीय चुनावी रणनीति, संगठनात्मक समन्वय और मतदाता सूची से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जब्त कर ली, जो “मनमाने, दुर्भावनापूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित” कार्रवाई का उदाहरण है।

याचिका के अनुसार, ईडी ने 8 जनवरी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम, 2002 (PMLA) की धारा 17 के तहत तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। ईडी का दावा है कि यह छापेमारी कोयला तस्करी घोटाले की जांच का हिस्सा थी।

टीएमसी ने कहा,

“जिन वस्तुओं और इलेक्ट्रॉनिक डाटा को जब्त किया गया है, वे गोपनीय राजनीतिक जानकारी/दस्तावेज हैं, जिनमें चुनावी रणनीति, आंतरिक मूल्यांकन, शोध सामग्री, संगठनात्मक समन्वय, और मतदाता सूची से संबंधित डेटा शामिल हैं।”

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पार्टी ने कहा कि इन सामग्रियों का किसी भी “शेड्यूल अपराध या अवैध संपत्ति” से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है, और ये PMLA की जांच के दायरे में नहीं आते।

टीएमसी ने आरोप लगाया कि ईडी की यह कार्रवाई चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप की साजिश है,

“इस तरह की लक्षित जब्ती कार्रवाई, याचिकाकर्ता के निजता के अधिकार (अनुच्छेद 21) और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सार्थक भागीदारी के अधिकार (अनुच्छेद 19) का उल्लंघन है।”

याचिका में कहा गया कि अगर जब्त किए गए डाटा के दुरुपयोग और प्रसार पर तुरंत रोक नहीं लगी, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी और लोकतंत्र की नींव कमजोर होगी।

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टीएमसी ने हाईकोर्ट से मांग की है कि वह ईडी को जब्त किए गए डाटा को खोलने, देखने, साझा करने या किसी भी गैर-संबंधित जांच के लिए उपयोग करने से रोके। याचिका में इसे “तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता वाला मामला” बताया गया है।

हालांकि ईडी ने इस याचिका पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन एजेंसी पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि 8 जनवरी की छापेमारी कोयला घोटाले से संबंधित वैध जांच का हिस्सा थी और सभी कार्रवाइयां कानून के तहत की गई हैं।

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कोयला तस्करी घोटाले की जांच पिछले कुछ वर्षों से जारी है, जिसमें करोड़ों रुपये के अवैध खनन और परिवहन का आरोप है। सीबीआई और ईडी की जांच को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव भी रहा है। टीएमसी का लगातार आरोप है कि जांच एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक प्रतिशोध लिया जा रहा है।

यह मामला आने वाले दिनों में कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है।

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