कानून उनकी मदद करता है जो सतर्क रहें,सोए रहने वालों की नही

पंजाब/हरियाणा—- वर्ष 1966 में ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मारे गए सेना के जवान के बच्चों ने 53 सालों बाद 20 एकड़ भूमि की मांग को लेकर दायर याचिका को पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कानून उनकी मदद करता है जो सतर्क रहें ,अधिकारों के प्रति सोए वालों की नही। 

कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अंबाला निवासी सरदार चरण सिंह और अन्य ने हाई कोर्ट को बताया कि उनके पिता भारतीय सेना में 1952 में सिख रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। ड्यूटी के दौरान एक दुर्घटना में वह शहीद हो गए थे। उनके शहीद होने के बाद याची की माँ ने 1967 में वित्तीय सहायता के लिए सेना से मदद मांगी। जिसके बाद उन्हें फैमिली पेंशन जारी कर दी गई। इसके बाद याची की माँ की 1999 में मृत्यु हो गई। 

2017 में याचिकाकर्ता ने अपने पिता को शहीद बताते हुए स्वम को उनका वारिस बताते हुए राज्य और केंद्र सरकार की नीतियों के आधार पर आर्थिक सहायता की मांग की । इस पर जिला सैनिक एंव अर्धसैनिक कल्याण विभाग ने सैनिक गुरुनाम सिंह के बारे में सिख रेजीमेंट के रिकॉर्ड ऑफिसर से जानकारी मांगी। जिसमे पता चला कि गुरुनाम सिंह सेना में थे और उनकी दुर्घटना में मौत हुई थी। वह शहीद नही हुए थे। 

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वर्ष 2018 में फिर से लीगल नोटिस के जवाब में एसीएस फाइनेंस हरियाणा ने बताया कि 1966-67 की केंद्रीय नीति के तहत इस प्रकार के मामलों में बेकार पड़ी भूमि का प्रवधान था। समस्त जिलों के डीसी से प्राप्त जानकारी के मुताबिक प्रदेश में कोई ऐसी जमीन नही है। हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलील सुनने के बाद याचिका को खारिज कर दिया है। 

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