संदिग्ध मरीजों की मौत भी कोरोना संक्रमण से मौत के आंकड़ों में जोड़े राज्य सरकार:-हाई कोर्ट

प्रयागराज—- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और अस्पतालों को कोविड के संदिग्ध मरीजों की मौत भी संक्रमण से मौत होने के आंकड़ों में जोड़ने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में डेडबॉडी को बिना प्रोटोकॉल लौटाना भयंकर भूल होगी।यदि मृतक में ह्रदय रोग या किडनी की समस्या नही है। तो उसे कोरोना संक्रमण से मौत मानी जायेगी।

हाई कोर्ट ने यूपी में कोरोना मामलों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान ये निर्देश दिए।कोर्ट ने सरकार को अगले 2 दिनों में हर जिले में तीन सदस्यीय महामारी जनशिकायत समिति बनाने के भी निर्देश दिए हैं। 

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने मेरठ के मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 20 लोगों की मौत पर जिलाधिकारी की रिपोर्ट को भी नकार दिया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ ज्ञानेंद्र कुमार ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट को बताया कि महज तीन मरीजों की हो कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी  सभी मौतों की वजह संक्रमण नही माननी चाहिए। इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा,हम यह जवाब स्वीकार नही कर सकते।

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इन मामलों में ट्रूनेट टेस्ट कराया जा सकता था। जो आरटीपीसीआर से जल्द नतीजे देता है। इस पर डॉ ज्ञानेंद्र ने कहा यहाँ ट्रूनेट मशीन नही है। हाई कोर्ट ने कहा सरकार का तो दावा है कि सभी सरकारी अस्पतालों में मशीन उपलब्ध करा दी है। मामले को अगली सुनवाई 17 मई को होगी।

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