नासिरनगर में 30 मई को हुई तोड़फोड़ कार्रवाई पर गुजरात हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद राज्य सरकार ने सूरत के नगर निगम आयुक्त एम. नागराजन को उनके पद से हटा दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि वरिष्ठ अधिकारियों के पद पर बने रहते हुए इस मामले की जांच निष्पक्ष नहीं हो सकती और यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी। इसके बाद राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार देर रात नागराजन के तबादले की अधिसूचना जारी की।
जारी आदेश के अनुसार, एम. नागराजन को गांधीनगर में समग्र शिक्षा अभियान का राज्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त किया गया है। वह इस पद पर रंजीत कुमार का स्थान लेंगे, जिन्हें गुजरात बिजली नियामक आयोग के सचिव पद की पूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। रंजीत कुमार इससे पहले इस पद का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे। वहीं, सूरत के जिलाधिकारी तेजस परमार को सूरत नगर निगम आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
कार्रवाई के लिए हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
यह प्रशासनिक फेरबदल नासिरनगर में बेघर हुए 26 निवासियों द्वारा दायर याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई के बाद हुआ है। नासिरनगर में 30 मई को चलाई गई तोड़फोड़ की कार्रवाई में लगभग 100 परिवार बेघर हो गए थे। सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पहली नज़र में यह कार्रवाई पूरी तरह गैरकानूनी प्रतीत होती है। अदालत ने टिप्पणी की कि जब तक सूरत के नगर आयुक्त और पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को उनके पदों से नहीं हटाया जाता, तब तक मामले की निष्पक्ष जांच संभव नहीं है और जांच केवल एक प्रहसन बनकर रह जाएगी।
पुनर्वास प्रस्ताव को अदालत ने किया खारिज
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास के लिए निवर्तमान नगर आयुक्त द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव पर भी कड़ा रुख अपनाया। नागराजन ने गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) के सहयोग से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) योजना के तहत प्रभावितों को आवास देने की योजना रखी थी। अदालत ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को राहत और आवास मुहैया कराने की पूरी जिम्मेदारी नगर निगम और राज्य प्रशासन की है। सरकारी निकाय अपनी संवैधानिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकते और न ही इन्हें किसी बाहरी संस्था को सौंप सकते हैं।
जांच और अब तक की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तोड़फोड़ की इस कार्रवाई में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। इस पूरे मामले में अब तक सूरत नगर निगम के पांच कनिष्ठ कर्मचारियों को निलंबित किया जा चुका है।
मामले की पृष्ठभूमि
स्थानांतरण से पूर्व अदालत में दाखिल अपने हलफनामे में एम. नागराजन ने बताया था कि संबंधित ज़मीन निजी व्यक्तियों की है, जिसे वे तीसरे पक्ष के माध्यम से विकसित करना चाहते थे। इस ज़मीन के लिए 12 मार्च को प्लॉट वैलिडेशन सर्टिफिकेट मांगा गया था, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद जब डेवलपर ने सड़क की सीमा के भौतिक चिन्हांकन (फिजिकल डिमार्केशन) का अनुरोध किया, तो नगर निगम अधिकारियों ने 30 मई को पुलिस बल को सूचित किया। इसी चिन्हांकन प्रक्रिया के दौरान वहां मौजूद निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया था।

