सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक अनियमितताओं के बीच संपूर्ण चयन प्रक्रिया को रद्द करने के लिए अहम सिद्धांत तय किए

सार्वजनिक नियुक्तियों पर न्यायिक निगरानी को सुदृढ़ करते हुए, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक निर्णय में यह स्पष्ट किया है कि जब किसी चयन प्रक्रिया में व्यापक भ्रष्टाचार हो, तो उसे पूरी तरह से रद्द किया जा सकता है। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने 2016 की पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) की भर्ती प्रक्रिया को रद्द करने के कोलकाता हाईकोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा।

मामला: स्टेट ऑफ वेस्ट बंगाल बनाम बैशाखी भट्टाचार्य व अन्य (सिविल अपील संख्या 9586/2024)

शीर्ष अदालत ने पाया कि चयन प्रक्रिया में “बड़े पैमाने पर हेराफेरी और धोखाधड़ी” हुई और इससे इसकी “विश्वसनीयता और वैधता समाप्त हो गई।”

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मामले की पृष्ठभूमि

मामला 2016 में बैशाखी भट्टाचार्य द्वारा दायर एक याचिका से शुरू हुआ, जिसमें आयु सीमा में छूट न दिए जाने को चुनौती दी गई थी। इसके बाद दर्जनों अन्य याचिकाएं दायर हुईं, जिनमें WBSSC द्वारा 18,617 शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों (कक्षा IX–X, XI–XII, ग्रुप C और D) की भर्ती में भारी गड़बड़ियों का खुलासा हुआ।

मुख्य अनियमितताएं:

  • रैंक में छलांग लगाना
  • पैनल से बाहर के उम्मीदवारों की नियुक्ति
  • खाली OMR शीट्स को उत्तीर्ण घोषित करना
  • पैनल की अवधि समाप्त होने के बाद नियुक्ति पत्र जारी करना
  • मूल और डिजिटल OMR रिकॉर्ड नष्ट करना
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CBI की जांच और सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजीत कुमार बाग समिति की रिपोर्ट में व्यापक भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई। इसके बाद कोलकाता हाईकोर्ट ने अप्रैल 2024 में पूरी प्रक्रिया को रद्द कर दिया। राज्य सरकार और प्रभावित उम्मीदवारों ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कानूनी प्रश्न:

  1. क्या आंशिक धोखाधड़ी के आधार पर पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द की जा सकती है?
  2. क्या सामूहिक रद्दीकरण से पहले व्यक्तिगत सुनवाई आवश्यक है?
  3. क्या WBSSC द्वारा OMR शीट्स का नष्ट किया जाना भर्ती नियमों के तहत वैध था?
  4. क्या निर्दोष उम्मीदवारों को दूसरों की गलती का खामियाजा भुगतना चाहिए?

मुख्य न्यायिक टिप्पणियां

CJI संजीव खन्ना ने कहा:

“बड़े पैमाने पर हेराफेरी और कवर-अप के प्रयासों ने चयन प्रक्रिया को इस हद तक क्षतिग्रस्त कर दिया है कि अब इसे आंशिक रूप से भी सुधारना संभव नहीं है।”

न्यायमूर्ति संजय कुमार ने सहमति जताते हुए कहा:

“व्यवस्थित अवैधता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, भले ही इससे कुछ व्यक्तियों को कठिनाई हो।”

पीठ ने यह भी माना कि ग्रुप C और D पदों के लिए OMR शीट्स का नष्ट किया जाना, जबकि नियम इसकी अनुमति नहीं देते थे, “सामग्री साक्ष्य को छिपाने” जैसा है।

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सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए प्रमुख सिद्धांत:

  • जहां पूरी चयन प्रक्रिया प्रणालीगत धोखाधड़ी से दूषित हो, वहां सामूहिक रद्दीकरण उचित है।
  • अनियमितताओं का प्रमाण आपराधिक मुकदमे जैसी कठोर कसौटी पर खरा उतरना आवश्यक नहीं—संभाव्यता का परीक्षण पर्याप्त है।
  • यदि निर्दोषों की पहचान व्यावहारिक रूप से असंभव हो, तो पूरी प्रक्रिया रद्द की जा सकती है।
  • सामूहिक धोखाधड़ी के मामलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों को शिथिल किया जा सकता है—व्यक्तिगत सुनवाई आवश्यक नहीं।
  • चयन प्रक्रिया के दौरान रिकॉर्ड का नष्ट किया जाना अवैध है और दोषी मानसिकता को दर्शाता है।

फैसला:

  • 2016 की WBSSC भर्ती पूरी तरह रद्द
  • अवैध रूप से नियुक्त उम्मीदवारों से वेतन की वसूली (12% ब्याज के साथ)
  • CBI को जांच जारी रखने और आरोप पत्र दाखिल करने का निर्देश
  • 2024 चुनावों के बाद नई भर्ती प्रक्रिया शुरू होगी

WBSSC को निर्देश:

  • OMR स्कैनिंग के लिए ओपन टेंडर प्रणाली अपनाएं
  • अंक, रैंक और चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाएं

आरोपित अधिकारी और निजी संस्थाएं:

सरकारी अधिकारी:

  • डॉ. सुबीर भट्टाचार्य – पूर्व चेयरमैन, WBSSC
  • डॉ. शर्मिला मित्रा – पूर्व चेयरपर्सन, केंद्रीय आयोग
  • डॉ. शांतिप्रसाद सिन्हा – पूर्व सलाहकार, आयोग
  • प्रो. सौमित्र सरकार, डॉ. महुआ विश्वास, डॉ. कल्याणमोय गांगुली आदि
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इनमें से कई के खिलाफ IPC की धाराएं 465, 468, 471, और 120B के तहत प्रथम दृष्टया अपराध सिद्ध हुए।

निजी कंपनियां:

  • M/s Nysa Communications Pvt. Ltd. – OMR कार्य में ठेका प्राप्त, डेटा में छेड़छाड़ का आरोप
  • M/s Data Scantech Solutions – स्कैनिंग उप-ठेकेदार, फर्जी फाइलों को बनाए रखा
  • निलाद्रि दास, पूर्व Nysa VP – बाद में कंपनी बदलने के बावजूद RTI सहायता देता रहा, जिससे घोटाले को छिपाने में मदद मिली

CBI ने इन कंपनियों से जो हार्ड डिस्क बरामद किए, उनमें 6,276 उम्मीदवारों की OMR स्कोरिंग में छेड़छाड़ के प्रमाण मिले। कई मामलों में खाली OMR शीट्स को पासिंग मार्क्स दिए गए।

वकील:

  • राज्य सरकार व WBSSC की ओर से: सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी
  • याचिकाकर्ताओं की ओर से: सीनियर एडवोकेट दुश्यंत दवे, विकास सिंह, और मनींदर सिंह

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