सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने पर सहमति दे दी है, जिसमें एक वकील के दफ्तर पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विभाग की तलाशी और उनका कंप्यूटर जब्त करने की कार्रवाई को सही ठहराया गया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने बुधवार को एडवोकेट पुनीत बत्रा की याचिका पर विचार करते हुए इसे जल्द सूचीबद्ध करने का भरोसा दिया। बत्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने मामले की संवेदनशीलता का हवाला देते हुए तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई थी।
अन्य मुवक्किलों के गोपनीय डेटा पर मंडराता खतरा
अदालत में दलील देते हुए वरिष्ठ वकीलों ने कहा कि जांच अधिकारियों द्वारा जब्त किए गए कंप्यूटर में पुनीत बत्रा के कई अन्य मुवक्किलों से संबंधित अत्यंत गोपनीय और विशेषाधिकार प्राप्त सामग्री मौजूद है। वकीलों ने आशंका जताई कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा बत्रा की याचिका खारिज किए जाने के बाद अब टैक्स अधिकारी इन संवेदनशील फाइलों तक पहुंच सकते हैं।
वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ को आगाह किया कि कंप्यूटर पहले ही कब्जे में लिए जा चुके हैं और अगर अधिकारी इस डेटा की पड़ताल करते हैं, तो इससे वकील और मुवक्किल के बीच संरक्षित विशेषाधिकार का खुला उल्लंघन होगा।
दलीलों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि अदालत इस याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी।

