सुप्रीम कोर्ट की सेबी को कड़ी चेतावनी; संदेसरा बंधुओं के खिलाफ कार्यवाही बंद न करने पर दी ‘कठोर रुख’ अपनाने की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) को एक सख्त निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने बाजार नियामक से कहा है कि वह स्टर्लिंग बायोटेक लिमिटेड (SBL) और इसके प्रमोटरों, नितिन और चेतन संदेसरा के खिलाफ चल रही सभी कार्यवाहियों को तुरंत बंद करे, अन्यथा अदालत को इस मामले में “कठोर रुख” अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की पीठ ने ₹5,100 करोड़ के सेटलमेंट के बावजूद मामलों को बंद करने में हो रही देरी पर नाराजगी जताई। पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि नियामक आदेश का पालन नहीं करता है, तो अदालत इस मुद्दे पर विस्तृत आदेश पारित करेगी।

यह पूरा मामला संदेसरा बंधुओं द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच से जुड़ा है। इसमें उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज FIR और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, कंपनी अधिनियम और ब्लैक मनी एक्ट के तहत चल रही कई कानूनी कार्यवाहियों को रद्द करने की मांग की थी।

पिछले साल 19 नवंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्ण-और-अंतिम निपटान (Full-and-final settlement) प्रस्ताव को स्वीकार किया था। इस समझौते के तहत, प्रमोटरों ने सभी दावों के निपटान के लिए सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री में ₹5,100 करोड़ जमा करने की सहमति दी थी। हाईकोर्ट जैसे आदेशों की तर्ज पर कोर्ट ने तब साफ कहा था कि पैसा जमा होने के बाद सेबी सहित सभी कार्यवाहियां रद्द मानी जाएंगी।

संदेसरा बंधुओं ने दिसंबर 2025 में यह राशि जमा कर दी थी। इसके बाद अन्य सभी एजेंसियां शांत हो गईं, लेकिन सेबी कथित तौर पर अपनी जांच जारी रखे हुए है। सेबी का आरोप है कि प्रमोटरों ने विदेशी बैंकों से कर्ज लिया और उस धन को ‘निवेश’ के रूप में कंपनी में वापस लाया, जो निवेशकों को गुमराह कर सकता था।

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सुनवाई के दौरान संदेसरा बंधुओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने पीठ को बताया कि स्पष्ट आदेश के बावजूद सेबी कार्यवाही बंद करने से इनकार कर रहा है।

इस पर सेबी के वकील को संबोधित करते हुए पीठ ने कहा:

“हमने कहा था कि पैसा जमा होने पर सेबी सहित सभी कार्यवाहियों को रद्द करने की आवश्यकता है। यदि आप इसे कर रहे हैं, तो ठीक है, वरना हम इस मुद्दे पर विस्तृत आदेश पारित करने के लिए मजबूर होंगे।”

सेबी के वकील ने अदालत को बताया कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता इस संबंध में नियामक के साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं। अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को तय की है।

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अदालत ने 20 सुरक्षित लेनदारों (Lenders) के एक कंसोर्टियम द्वारा दायर आवेदन पर भी गौर किया, जो जमा की गई ₹5,100 करोड़ की राशि में से अपना हिस्सा मांग रहे हैं। बैंकों ने अदालत को बताया था कि संदेसरा ग्रुप की संस्थाओं पर उनका कुल बकाया ₹19,283.77 करोड़ है।

धन के वितरण के लिए बैंकों ने एक विशेष पद्धति अपनाई है, जिसमें विदेशी ऋणों को ₹63 प्रति अमेरिकी डॉलर की दर से (वर्ष 2015 की औसत दर, जब खाते NPA हुए थे) बदला गया है और NPA की तारीख से 9% वार्षिक ब्याज लागू किया गया है।

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25 मार्च को, पीठ ने उन 20 बैंकों को तुरंत राशि जारी करने का निर्देश दिया था जिन्होंने अपने दस्तावेज और हलफनामे जमा कर दिए थे। एचडीएफसी बैंक और कुछ विदेशी बैंकों सहित शेष छह लेनदारों के लिए, अदालत ने निर्देश दिया कि उनका हिस्सा तब तक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखा जाए जब तक वे अपने औपचारिक दावे पेश नहीं कर देते।

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