सुप्रीम कोर्ट ने पीएम-जय लाभार्थियों पर ‘ग़ैर-ज़रूरी एंजियोप्लास्टी’ करने वाले गुजरात के कार्डियोलॉजिस्ट की ज़मानत रद्द करने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गुजरात सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें एक कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. प्रशांत वज़ीरानी की ज़मानत रद्द करने की मांग की गई थी। उन पर आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PMJAY) के दो लाभार्थियों पर ग़ैर-ज़रूरी और कथित रूप से गलत एंजियोप्लास्टी करने का आरोप है, जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी।

न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए. एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट द्वारा 8 दिसंबर 2025 को दी गई नियमित ज़मानत के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

“वह एक डॉक्टर है, कार्डियोलॉजिस्ट है, उसे सेवा करने दीजिए। आप उस पर नज़र रख सकते हैं। अगर वह फिर से कुछ करता है, तो आप उचित कदम उठा सकते हैं,” पीठ ने राज्य की स्थायी अधिवक्ता स्वाति घिल्डियाल से कहा।

राज्य सरकार ने दलील दी कि मामला गंभीर है और डॉक्टर की वजह से दो लोगों की जान चली गई। इस पर न्यायमूर्ति माहेश्वरी ने कहा,

“हमने सभी रिकॉर्ड देख लिए हैं। हम हस्तक्षेप नहीं करेंगे।”

READ ALSO  मीडिया चैनलों को विनियमित करने के लिए कोई वैधानिक शून्य, मजबूत तंत्र नहीं है: केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

डॉ. प्रशांत वज़ीरानी को 14 नवंबर 2024 को अहमदाबाद के वस्त्रापुर पुलिस थाने ने गिरफ़्तार किया था। उन पर ख्याति मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल में दो लाभार्थियों – नगरभाई सेनमा (59) और महेश बारोट (45) – पर बिना आवश्यकता के एंजियोप्लास्टी करने और उनकी मृत्यु का कारण बनने का आरोप है।

तीन एफआईआर दर्ज की गई थीं—दो मृतकों के परिजनों की शिकायत पर और एक जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा राज्य सरकार की ओर से।

READ ALSO  एक्साइज पॉलिसी मामला: सीएम केजरीवाल को आज दिल्ली कोर्ट में पेश किया जाएगा

पुलिस के अनुसार, आरोपी डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन ने प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत मिलने वाले आर्थिक लाभ के लिए “षड्यंत्र रचा” और ग़लत तरीके से रोगियों को हृदय में ब्लॉकेज का डर दिखाकर सर्जरी के लिए मजबूर किया।

एफआईआर के अनुसार, 10 नवंबर 2024 को अस्पताल ने मेहसाणा ज़िले के बोरिसणा गांव में मुफ्त स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया था। इसके बाद 19 ग्रामीणों को 11 नवंबर को अहमदाबाद अस्पताल लाया गया और एंजियोग्राफी की गई। उसी दिन सात लोगों की एंजियोप्लास्टी कर दी गई, जिनमें से दो की मौत हो गई।

पुलिस का कहना है कि अस्पताल ने ब्लॉकेज की झूठी रिपोर्ट दी और जल्दबाज़ी में ऑपरेशन किया ताकि सरकारी योजना के पैसे का लाभ लिया जा सके। यह भी आरोप है कि मरीजों को ठीक से ऑपरेशन के बाद की देखरेख नहीं दी गई और उनकी मौत के समय कोई कार्डियोलॉजिस्ट मौजूद नहीं था।

सुनवाई के दौरान पीठ ने डॉक्टर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रंजीत कुमार से पूछा:

READ ALSO  [धारा 138 एन.आई. अधिनियम] दोषसिद्धि के साथ चेक राशि, ब्याज और मुआवज़े की वसूली के लिए पर्याप्त जुर्माना भी अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

“आप कार्डियोलॉजिस्ट हैं, ये सब क्यों कर रहे हैं? इस तरह की चीज़ों में मत पड़िए।”

हालांकि मामले की गंभीरता को देखते हुए भी, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ज़मानत आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया और सरकार को निगरानी रखने और ज़रूरत पड़ने पर आगे की क़ानूनी कार्रवाई करने की छूट दी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles