देश में पुलिस बलों को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक नई अम्ब्रेला योजना तैयार की है। इस योजना की सैद्धांतिक मंजूरी के लिए प्रस्ताव वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग को भेजा गया है। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि यह प्रस्ताव 8 जुलाई को सौंपा गया था और वर्तमान में इस पर विचार किया जा रहा है।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष मामले की पैरवी कर रहे अपर सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) राजकुमार भास्कर ठाकरे ने यह जानकारी दी। शीर्ष अदालत ने लॉ ऑफिसर को इस अम्ब्रेला योजना के दस्तावेज रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश देते हुए अतिरिक्त कागजात दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अदालत अब इस मामले पर अगली सुनवाई 1 सितंबर को करेगी।
इसके साथ ही, केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि देश भर के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए जारी वित्तीय सहायता योजना की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2027 तक कर दी गई है।
सीसीटीवी स्थापना में प्रगति की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरों के चालू न होने से संबंधित याचिकाओं और एक स्वतः संज्ञान मामले पर सुनवाई कर रहा था। 22 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान अदालत ने संतोष व्यक्त किया था कि इस मामले में स्थिति में काफी सुधार हुआ है और कार्य सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मामले में अदालत की सहायता कर रहे न्याय मित्र (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया था कि कैमरों की स्थापना के काम में काफी प्रगति हुई है। इससे पहले 13 मई को भी एमिकस क्यूरी ने रिपोर्ट दी थी कि अधिकांश राज्य सही दिशा में कदम उठा रहे हैं और पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।
वित्तीय आवंटन का ढांचा
पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय भागीदारी का ढांचा तय किया गया है:
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीसीटीवी स्थापना का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाता है।
- पहाड़ी राज्यों में 90 प्रतिशत राशि केंद्र सरकार देती है, जबकि 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार का होता है।
- अन्य सभी राज्यों में 60 प्रतिशत धनराशि केंद्र सरकार उपलब्ध कराती है और शेष 40 प्रतिशत खर्च संबंधित राज्य सरकारें उठाती हैं।
दिशानिर्देश और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पुलिस हिरासत में मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सबसे पहले 2018 में सभी पुलिस थानों में सुरक्षा कैमरे लगाने का आदेश दिया था। बाद में कैमरों के खराब होने की मीडिया रिपोर्टों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने खुद संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज किया था।
दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्देशों का विस्तार करते हुए सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों के कार्यालयों में भी सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया था।
दिशानिर्देशों के तहत राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को थानों के हर हिस्से में कैमरों की कवरेज सुनिश्चित करना अनिवार्य है। इसमें प्रवेश और निकास द्वार, मुख्य गेट, हवालात, गलियारे, लॉबी, रिसेप्शन और हवालात के बाहर का क्षेत्र शामिल है। इन सभी प्रणालियों में नाइट-विज़न, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होना आवश्यक है, तथा कम से कम एक वर्ष तक का डेटा सुरक्षित रखना अनिवार्य किया गया है।

