सुप्रीम कोर्ट में बंदरों के आतंक से निजात पाने की तैयारी; जजों के आवासों और कोर्ट परिसर में तैनात किए जाएंगे 100 ‘मंकी चेजर्स’

सुप्रीम कोर्ट ने अपने परिसर और माननीय जजों के आवासीय बंगलों में बंदरों के बढ़ते आतंक को रोकने के लिए एक औपचारिक निविदा प्रक्रिया (Tender Process) शुरू की है। 2 अप्रैल, 2026 को जारी एक बिड नोटिस के माध्यम से, कोर्ट ने अगले दो वर्षों के लिए एक विशेषज्ञ एजेंसी की सेवाएं लेने का निर्णय लिया है, जो बंदरों को भगाने के लिए लगभग 100 प्रशिक्षित कर्मियों की तैनाती करेगी।

परियोजना का विवरण और दायरा

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा जारी इस निविदा (Ref. F.No. 1/MMM/2026-28/SCI(AM)) के तहत ऐसी एजेंसियों की तलाश की जा रही है जो अनुभवी ‘मंकी चेजर्स’ और ‘हैंडलर्स’ उपलब्ध करा सकें। इन कर्मियों की तैनाती निम्नलिखित स्थानों पर की जाएगी:

  • सुप्रीम कोर्ट का मुख्य परिसर।
  • सुप्रीम कोर्ट गेस्ट हाउस।
  • कोर्ट के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित माननीय जजों के लगभग 35 से 40 आवासीय बंगले।

इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य बंदरों को डराकर भगाना है, लेकिन इसके साथ ही यह अनिवार्य शर्त रखी गई है कि इस दौरान पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और अन्य संबंधित पर्यावरण एवं वन्यजीव नियमों का कड़ाई से पालन किया जाए।

महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन

यह निविदा प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन ‘GeM पोर्टल’ के माध्यम से संचालित की जा रही है:

  • आवेदन की अंतिम तिथि: 23 अप्रैल, 2026 (दोपहर 3:00 बजे तक)।
  • तकनीकी बिड खोलने का समय: 23 अप्रैल, 2026 (दोपहर 3:30 बजे)।
  • बयाना राशि (EMD): ₹13,50,000 (तेरह लाख पचास हजार रुपये)। हालांकि, एमएसएमई (MSEs) और स्टार्टअप्स को नियमानुसार इसमें छूट दी जाएगी।
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एजेंसियों के लिए सख्त पात्रता मानदंड

कार्य की संवेदनशीलता को देखते हुए रजिस्ट्री ने एजेंसियों के लिए कड़े मानक निर्धारित किए हैं:

  1. अनुभव: बोली लगाने वाली फर्म के पास केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों (PSUs) में इसी तरह की सेवाएं देने का पिछला अनुभव होना अनिवार्य है।
  2. मौजूदा क्षमता: एजेंसी के पास कम से कम एक ऐसा वर्तमान अनुबंध होना चाहिए जिसमें उसने बंदरों को भगाने के लिए न्यूनतम 50 कर्मियों को तैनात किया हो।
  3. वित्तीय स्थिति: पिछले तीन वर्षों के दौरान फर्म का औसत वार्षिक टर्नओवर कम से कम ₹5 करोड़ होना चाहिए।
  4. कर्मचारी संख्या: एजेंसी के पास पिछले दो वर्षों से अपने रोल पर कम से कम 50 कर्मचारियों की औसत संख्या होनी चाहिए।
  5. क्षेत्रीय उपस्थिति: एजेंसी का दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में कार्यालय होना अनिवार्य है।
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नियम, शर्तें और कानूनी अनुपालन

तैनात किए जाने वाले कर्मियों को ‘अर्ध-कुशल’ (Semi-Skilled) श्रेणी में रखा गया है और उन्हें दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दी जाएगी। सफल एजेंसी को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन (Police Verification) हो और वे अपनी ड्यूटी के दौरान निर्धारित वर्दी और पहचान पत्र के साथ मौजूद रहें।

रजिस्ट्री ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ये कर्मी संबंधित एजेंसी के कर्मचारी होंगे और सुप्रीम कोर्ट में रोजगार का कोई दावा नहीं कर सकेंगे। साथ ही, ड्यूटी के दौरान किसी भी दुर्घटना, चोट या मृत्यु की स्थिति में मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।

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सेवा शुल्क और जुर्माना

वित्त मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार, न्यूनतम सेवा शुल्क (Service Charge) 3.85% तय किया गया है। इससे कम कोट करने वाली फर्मों को अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सफल वेंडर को अनुबंध मूल्य का 3% ‘परफॉर्मेंस सिक्योरिटी’ के रूप में जमा करना होगा। सेवाओं में किसी भी प्रकार की कमी या नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना और अनुबंध रद्द करने जैसे कड़े प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

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