‘बाल तस्करी की मंडी बन गई है दिल्ली’: रेलवे स्टेशनों पर बदस्तूर जारी अपराधों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी में बच्चों की तस्करी के बढ़ते मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। हाईकोर्ट ने बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि दिल्ली अब नाबालिगों के अवैध व्यापार के लिए एक “मंडी” बन गई है।

चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच ने रेलवे स्टेशनों और आसपास के इलाकों में खुलेआम हो रही इन वारदातों पर संज्ञान लेते हुए रेलवे मंत्रालय, दिल्ली सरकार, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) को नोटिस जारी किया है। यह आदेश जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन एलायंस द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान आया।

जनहित याचिका में रेलवे परिसरों और ट्रेनों के भीतर बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पीड़ित बच्चों की पहचान, बचाव और पुनर्वास के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) मौजूद होने के बावजूद अधिकारी इनका “घोर उल्लंघन” कर रहे हैं। इसकी वजह से न केवल न्याय प्रक्रिया बाधित हो रही है, बल्कि बचाए गए बच्चों को दोबारा तस्करी के जाल में धकेला जा रहा है।

सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि पिछले न्यायिक आदेशों के बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। हाईकोर्ट ने उल्लेख किया कि हालांकि रेलवे और पुलिस द्वारा कागजों पर उपाय अपनाए गए हैं, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन की कमी के कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।

बेंच ने मौखिक रूप से कहा, “दिल्ली अब बाल तस्करी की मंडी बन गई है। इस तथ्य की पुष्टि के लिए आपको याचिका पढ़ने की भी जरूरत नहीं है, बस दो घंटे बाहर घूम कर देख लीजिए।”

READ ALSO  क्या एक वकील को पुनः AIBE परीक्षा पास करनी होगी अगर नौकरी के लिए उसने अपना लाइसेन्स सरेंडर किया था? सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से पूँछा

अपने औपचारिक आदेश में हाईकोर्ट ने कहा:

“यह सर्वविदित है कि कम उम्र के बच्चों की तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है। इस अदालत ने समय-समय पर चिंता जताई है और निर्देश भी दिए हैं, फिर भी यह खतरा बदस्तूर जारी है।”

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रभासहाय कौर ने कोर्ट के सामने चौंकाने वाले आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 2018 से 2024 के बीच रेलवे परिसरों से 84,000 से अधिक बच्चों को रेस्क्यू किया है।

याचिका में आनंद विहार रेलवे स्टेशन की एक घटना का विशेष उल्लेख किया गया, जहां रेस्क्यू की गई एक बच्ची को कानून के अनुसार बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने पेश करने के बजाय वापस तस्करों को सौंप दिया गया था। बाद में एक अन्य छापेमारी के दौरान उस बच्ची को दोबारा छुड़ाया गया। याचिका के अनुसार, रेलवे मंत्रालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के SOP का पालन न करना ही इन बच्चों के दोबारा तस्करी होने का मुख्य कारण है।

READ ALSO  ज्योति हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दी गई समय सीमा बीती ,निर्णय नही

हाईकोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार के संबंधित अधिकारियों से इस मामले में विस्तृत जवाब मांगा है। विशेष रूप से, NCPCR को निर्देश दिया गया है कि वह बच्चों की तस्करी से संबंधित डेटा और सुझाव पेश करे ताकि अदालत इस संकट के समाधान के लिए उचित निर्देश जारी कर सके।

हाईकोर्ट ने जोर देकर कहा कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि SOP का सख्ती से पालन हो और एक ऐसा तंत्र बने जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि रेस्क्यू किए गए बच्चे दोबारा तस्करों के हाथ न लगें।

READ ALSO  जूही चावला ने 5G मुकदमा दायर करने की ये वजह बताई

इस मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles