पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में सरकारी सर्किट हाउस से आधी रात को कथित तौर पर बाहर निकाले जाने के मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अब गुरुवार को सुनवाई करेगा। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले को गुरुवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।
यह मामला तब सुनवाई के लिए आया जब कृष्णानगर से सांसद महुआ मोइत्रा के मुख्य वकील गोपाल शंकरनारायणन दूसरी अदालत में व्यस्त थे। उनके उपलब्ध न होने के कारण पीठ से मामले को कुछ समय बाद उसी दिन सुनने का आग्रह किया गया था, लेकिन पीठ ने उसी दिन दोबारा सुनवाई करने से इनकार करते हुए अगली तारीख गुरुवार तय कर दी।
केंद्र सरकार ने उठाए सीधे सुप्रीम कोर्ट आने पर सवाल
संक्षिप्त अदालती कार्यवाही के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने महुआ मोइत्रा द्वारा सीधे सुप्रीम कोर्ट का रुख करने पर कड़ा एतराज जताया। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि सांसदों के व्यक्तिगत मामलों को सीधे शीर्ष अदालत के समक्ष इस तरह उठाना उचित नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि याचिका में तथ्यात्मक रूप से गलत बयान भी दर्ज किए गए हैं।
दूसरी तरफ, महुआ मोइत्रा के वकील ने इस मामले में तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि पूरा घटनाक्रम एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न खड़ा करता है, जिसकी स्वतंत्र जांच की जरूरत है। उन्होंने पीठ को अवगत कराया कि हाईकोर्ट द्वारा पहले ही सुरक्षात्मक आदेश जारी किए जाने के बावजूद सांसद के साथ यह बर्ताव किया गया।
14 अगस्त की रात का विवाद और नारेबाजी
यह पूरा विवाद अगस्त महीने का है, जब संसद सत्र समाप्त होने के बाद महुआ मोइत्रा अपने संसदीय क्षेत्र कृष्णानगर स्थित सरकारी सर्किट हाउस में रात गुजारने पहुंची थीं। सांसद का कहना था कि एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने के नाते वह वहां ठहरने की हकदार थीं और उन्हें विधिवत कमरा भी आवंटित किया गया था। उनका आरोप है कि नादिया जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें परेशान करने की नीयत से आधी रात को जबरन कमरा खाली करने का दबाव बनाया।
मोइत्रा ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि 14 अगस्त की रात जब उन्होंने सर्किट हाउस खाली करने से मना कर दिया, तो परिसर के बाहर भारी भीड़ जुट गई और “जय श्री राम” के नारे लगाने लगी।
लोकसभा अध्यक्ष से हस्तक्षेप की मांग
इस घटना के बाद सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर जिला प्रशासन के आचरण की शिकायत की थी और हस्तक्षेप की मांग की थी। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया था कि न तो बुकिंग के समय और न ही चेक-इन के दौरान अधिकारियों ने किसी प्रकार की रोक या पाबंदी की सूचना दी थी।
सांसद ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने रेखांकित किया कि संबंधित सर्किट हाउस जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) के सरकारी आवासों के ठीक सामने स्थित है। ऐसे अति-सुरक्षित क्षेत्र में किसी भी भीड़ का जमा होना प्रशासनिक और सुरक्षा चूक की ओर इशारा करता है। मोइत्रा ने इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों द्वारा किए गए कथित उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात भी कही थी।

