छत्तीसगढ़ कोयला खदान मामला: सुप्रीम कोर्ट ने नई जन सुनवाई को बताया अनिवार्य, लेकिन महागेन्को के खनन पर नहीं रहेगी रोक

छत्तीसगढ़ स्थित गारे पेलमा सेक्टर-II कोयला खदान के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि नई पर्यावरण मंजूरी (EC) प्रदान करने से पहले नए सिरे से सार्वजनिक जन सुनवाई आयोजित करना अनिवार्य है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (महागेन्को) को बड़ी राहत देते हुए यह निर्देश भी दिया है कि जन सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने तक खदान में वर्तमान खनन गतिविधियों पर कोई रोक नहीं लगाई जाएगी।

NGT के पास वापस भेजा गया मामला, 3 अगस्त से शुरू होगी निगरानी

मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने 24 जुलाई को यह निर्णय दिया, जिसे बाद में अपलोड किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें बिना नई जन सुनवाई के दी गई पर्यावरण मंजूरी को स्वीकार कर लिया गया था। शीर्ष अदालत ने इस मामले को वापस NGT को भेजते हुए निर्देश दिया है कि वह 3 अगस्त से मामले की सुनवाई करे और जन सुनवाई प्रक्रिया की निगरानी करते हुए इसका शीघ्र अंतिम निपटारा करे।

READ ALSO  केरल हाईकोर्ट ने 1995 षड्यंत्र मामले में केपीसीसी प्रमुख को बरी कर दिया

‘नए सिरे से’ प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट

मामले पर टिप्पणी करते हुए पीठ ने कहा कि NGT के पिछले आदेश में प्रयुक्त ‘नए सिरे से’ (afresh) शब्द का सीधा और स्पष्ट अर्थ यही था कि प्राधिकारियों के लिए नई जन सुनवाई आयोजित करना बाध्यकारी था। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, पुरानी वीडियोग्राफी या दस्तावेजों की समीक्षा करना नई जन सुनवाई का विकल्प नहीं हो सकता।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि हमारी सुविचारित राय में ‘नए सिरे से’ शब्द यह दर्शाता है कि अधिकारियों के लिए नई जन सुनवाई आयोजित करना अनिवार्य था। चूंकि ऐसा नहीं किया गया, इसलिए NGT का पिछला निर्णय कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है।

खनन गतिविधियों को अंतरिम राहत

READ ALSO  आबकारी 'घोटाले' ने लाभ को सरकार से निजी संस्थाओं में स्थानांतरित कर दिया, सिसोदिया ने 290 करोड़ रुपये का दोषपूर्ण धन उत्पन्न किया: ईडी

पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया दोबारा पूरी करने का आदेश देने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने महागेन्को के खनन कार्यों को रोकने से इनकार कर दिया। पीठ ने पाया कि परियोजना के संदर्भ में मुख्य शर्तों का काफी हद तक अनुपालन (substantial compliance) पहले ही हो चुका है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इसलिए महागेन्को के काम में कोई बाधा नहीं उत्पन्न होगी कि अब तक आवश्यक नई जन सुनवाई पूरी नहीं की गई है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी दोहराया कि पर्यावरण मंजूरी जारी करने से पहले नई जन सुनवाई हर हाल में की जानी चाहिए थी।

पर्यावरण मंजूरी और कानूनी विवाद का घटनाक्रम

यह विवाद गारे पेलमा सेक्टर-II खदान परियोजना की पर्यावरण मंजूरी से जुड़ा है। महागेन्को को सबसे पहले जुलाई 2022 में इस परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी मिली थी। याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को NGT में चुनौती दी, जिसके बाद जनवरी 2024 में ट्रिब्यूनल ने मूल्यांकन प्रक्रिया की खामियों के आधार पर मंजूरी रद्द कर दी और पर्यावरण मंत्रालय को जन सुनवाई के स्तर से दोबारा जांच करने का आदेश दिया।

READ ALSO  हाई कोर्ट ने वन विभाग को असोला भट्टी अभयारण्य के अंदर कार्यक्रम आयोजित करने से रोक दिया

इसके बाद महागेन्को ने परियोजना को फिर से मूल्यांकन के लिए भेजा। पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (EAC) ने अगस्त 2024 में बिना कोई नई जन सुनवाई आयोजित किए, केवल पुराने रिकॉर्ड, वीडियोग्राफी और अतिरिक्त समीक्षा के आधार पर नई पर्यावरण मंजूरी जारी कर दी।

जब इस नई मंजूरी को NGT के समक्ष चुनौती दी गई, तो ट्रिब्यूनल ने 17 अप्रैल के अपने आदेश में इसे यह कहते हुए सही ठहराया कि पुरानी सुनवाई के रिकॉर्ड का अवलोकन पर्याप्त था। इसके बाद याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे, जहां शीर्ष अदालत ने NGT के इस रुख को खारिज करते हुए नई जन सुनवाई के आदेश को अनिवार्य करार दिया।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles