जेलों की भीड़भाड़ और महिला कैदियों की स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों से 18 मई तक मांगी ताज़ा रिपोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की जेलों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को विस्तृत और अद्यतन जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत ने खास तौर पर जेलों में भीड़भाड़, महिलाओं के लिए सुविधाएं और उनके साथ रहने वाले बच्चों के कल्याण से जुड़ी जानकारी 18 मई तक देने को कहा है।

 न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने 17 मार्च को यह आदेश उस स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) मामले में पारित किया, जो जेलों में अमानवीय परिस्थितियों से संबंधित है।

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा पहले जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए थे, वे वर्ष 2023 के हैं और वर्तमान स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करते। वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव अग्रवाल, जो इस मामले में अमीकस क्यूरी के रूप में सहायता कर रहे हैं, ने इस ओर अदालत का ध्यान आकर्षित किया।

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पीठ ने कहा कि इतने महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रभावी निर्णय लेने के लिए ताज़ा और वास्तविक आंकड़ों का उपलब्ध होना आवश्यक है। इसी को ध्यान में रखते हुए अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने क्षेत्र की सभी जेलों से संबंधित विस्तृत जानकारी शपथपत्र के रूप में दाखिल करें।

अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़ों में प्रत्येक जेल की स्वीकृत क्षमता, वहां बंद कैदियों की संख्या, और भीड़भाड़ का प्रतिशत शामिल होना चाहिए। साथ ही, भीड़भाड़ कम करने के लिए उठाए गए या प्रस्तावित कदमों का भी उल्लेख करना होगा।

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महिला कैदियों की स्थिति पर विशेष ध्यान देते हुए कोर्ट ने महिला जेलों की संख्या, वहां उपलब्ध सुविधाओं और महिला कैदियों के साथ रह रहे बच्चों के लिए शिक्षा एवं चिकित्सा व्यवस्थाओं की जानकारी भी मांगी है।

इसके अलावा, जेल प्रशासन से जुड़े अन्य पहलुओं जैसे कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या, वर्तमान रिक्तियां और उन्हें भरने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी देना होगा।

अदालत ने निर्देश दिया कि यह पूरी जानकारी 1 मार्च 2026 की स्थिति के आधार पर दी जाए, जिससे वर्तमान हालात का सही आकलन किया जा सके।

सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने गृह सचिव द्वारा शपथपत्र के रूप में यह जानकारी 18 मई तक दाखिल करनी होगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री इन शपथपत्रों को अमीकस क्यूरी को भेजेगी, जो इन आंकड़ों का समेकित विश्लेषण प्रस्तुत करेंगे।

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मामले की अगली सुनवाई 26 मई को निर्धारित की गई है।

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