आइसक्रीम वेंडर के खिलाफ छेड़छाड़ और पीछा करने की एफआईआर दिल्ली हाईकोर्ट ने की रद्द; पुलिसकर्मियों को आइसक्रीम खिलाने की इच्छा को कोर्ट ने सराहा

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आइसक्रीम विक्रेता के खिलाफ साल 2018 में दर्ज की गई ‘वॉयरिज्म’ (ताक-झांक), पीछा करने और जबरन वसूली से संबंधित एफआईआर को रद्द कर दिया है। जस्टिस सौरभ बनर्जी ने यह फैसला आरोपी और शिकायतकर्ता के बीच हुए समझौते के बाद सुनाया। इस दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता (आइसक्रीम वेंडर) के उस प्रस्ताव की भी सराहना की, जिसमें उसने मॉडल टाउन थाने के सभी पुलिसकर्मियों को आइसक्रीम खिलाने की इच्छा जताई थी।

कोर्ट ने कहा कि चूंकि दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से आपसी समझौता कर लिया है, इसलिए इस आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना “व्यर्थ की कवायद” (exercise in futility) होगी।

यह मामला 20 जनवरी 2018 का है, जब मॉडल टाउन पुलिस स्टेशन में एफआईआर संख्या 23/2018 दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता पर आईपीसी की धारा 354(C) (ताक-झांक), 354(D) (पीछा करना), 385 (जबरन वसूली के लिए किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाने का डर दिखाना) और 384 (जबरन वसूली) के तहत आरोप लगाए गए थे।

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सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि इस साल जनवरी में दोनों पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था। इस समझौते के तहत याचिकाकर्ता ने पीड़िता को ₹45,000 की निपटान राशि का भुगतान किया।

कोर्ट में सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता महिला ने बताया कि वह अब इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहती है। उसने कोर्ट को जानकारी दी कि अब उसकी शादी हो चुकी है और उसका एक बच्चा भी है। वह अपने पुराने विवादों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती है। उसने स्पष्ट किया कि उसे एफआईआर और उससे जुड़ी कार्यवाही रद्द करने पर कोई आपत्ति नहीं है।

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जस्टिस सौरभ बनर्जी ने 13 मार्च को पारित अपने आदेश में घटना के बाद के छह वर्षों में परिस्थितियों में आए बदलावों पर गौर किया।

कोर्ट ने कहा, “यह अदालत इस बात से अवगत है कि वर्तमान एफआईआर वॉयरिज्म, पीछा करने और जबरन वसूली के कथित अपराधों के लिए दर्ज की गई थी। हालांकि, तब से अब तक काफी समय बीत चुका है और शिकायतकर्ता की शादी हो चुकी है, उसका एक बच्चा है और वह अपने नए स्थिर जीवन में आगे बढ़ना चाहती है।”

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मॉडल टाउन पुलिस कर्मियों के लिए याचिकाकर्ता के प्रस्ताव पर टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने कहा: “चूंकि याचिकाकर्ता एक आइसक्रीम विक्रेता है, इसलिए एक नेक भावना (benevolent gesture) के तौर पर, वह जांच अधिकारी के साथ समन्वय करके एक सप्ताह के भीतर मॉडल टाउन थाने के पूरे स्टाफ/कर्मियों को आइसक्रीम वितरित करना चाहता है। यह अदालत इस भाव की सराहना करती है।”

हाईकोर्ट ने अंततः निष्कर्ष निकाला कि स्वैच्छिक समझौते को देखते हुए याचिका स्वीकार की जाती है और 2018 की एफआईआर से जुड़ी सभी कानूनी कार्यवाहियां रद्द की जाती हैं।

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