पूर्व हाईकोर्ट जज यशवंत वर्मा से जुड़े कैश कांड की जांच याचिका सुप्रीम कोर्ट ने की खारिज

पूर्व हाईकोर्ट जज यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित आवास पर संदिग्ध नकदी मिलने के मामले में एफआईआर दर्ज करने और अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने इस याचिका को न्यायिक प्रक्रिया का अनुचित उपयोग और सस्ती लोकप्रियता पाने का जरिया करार दिया।

जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने अधिवक्ता घनश्याम उपाध्याय की ओर से दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने याचिकाकर्ता से कहा कि वकील होने के बावजूद इस तरह की याचिका दाखिल करना अदालत के समय और प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

अदालत में याचिकाकर्ता की दलीलें

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता घनश्याम उपाध्याय ने तर्क दिया कि पद से इस्तीफा दे देने मात्र से किसी पूर्व जज की आपराधिक जवाबदेही समाप्त नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के जज लोक सेवक की श्रेणी में आते हैं और पद छोड़ने के बाद उन्हें किसी भी तरह की कानूनी छूट नहीं मिलती है।

पहले खारिज हुई याचिका का जिक्र आने पर उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि पिछला मामला शिकायत दर्ज न होने के तकनीकी आधार पर खारिज हुआ था, जबकि इस बार उन्होंने औपचारिक शिकायत दर्ज कराने के बाद अदालत का रुख किया है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार न करते हुए याचिका पूरी तरह से खारिज कर दी।

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इस्तीफे के बाद महाभियोग की कार्यवाही समाप्त

यह कानूनी विवाद पूर्व जज यशवंत वर्मा के 9 अप्रैल को दिए गए इस्तीफे से जुड़ा है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा था। उस समय उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर लोकसभा में महाभियोग की प्रक्रिया चल रही थी।

वर्मा द्वारा पद छोड़ने और लोकसभा की जांच समिति से अलग होने के कारण उनके खिलाफ शुरू की गई बर्खास्तगी की संसदीय प्रक्रिया स्वतः ही प्रभावहीन हो गई। इस्तीफा देने से पहले वर्मा इलाहाबाद हाईकोर्ट में कार्यरत थे और इससे पूर्व वह दिल्ली हाईकोर्ट के जज भी रह चुके थे। उनका कार्यकाल 5 जनवरी 2031 को समाप्त होना था।

होली की रात आगजनी से खुला था मामला

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यह पूरा विवाद 14 मार्च 2025 की रात का है, जब लुटियंस दिल्ली स्थित तत्कालीन दिल्ली हाईकोर्ट जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर रात करीब 11:35 बजे अचानक आग लग गई थी। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग पर काबू पाने के दौरान दमकलकर्मियों को परिसर के भीतर जले हुए नोटों के कई बंडल मिले, जिसके बाद इस मामले ने तूल पकड़ा और संसदीय जांच की स्थिति बनी।

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