मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार जिले की ग्राम पंचायत सोदपुर के 2022 के सरपंच चुनाव में दोबारा मतगणना कराने के फैसले को बरकरार रखा है। चुनाव में संजय मालीवाल ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कविता ठाकुर को केवल एक वोट से हराया था, जबकि 84 मतपत्र खारिज कर दिए गए थे। हाईकोर्ट ने कहा कि बेहद कम अंतर के साथ मतगणना में अनियमितताओं से जुड़े आरोप और साक्ष्य मौजूद होने की स्थिति में वोटों का भौतिक सत्यापन और दोबारा मतगणना उचित है।
जस्टिस संदीप एन भट्ट ने संजय मालीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए चुनाव प्राधिकरण के 18 सितंबर 2025 के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया, जिसमें मतों की दोबारा गिनती का निर्देश दिया गया था। मालीवाल को 758 वोट मिले थे, जबकि कविता ठाकुर को 757 वोट हासिल हुए थे।
हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को कहा कि जब चुनाव में जीत-हार का अंतर केवल एक वोट हो और 84 मतपत्र खारिज किए गए हों, तब मतपत्रों का निरीक्षण और उनकी दोबारा गिनती यह पता लगाने का विश्वसनीय और कानूनी रूप से मान्य तरीका है कि वोटों को गलत तरीके से स्वीकार या खारिज किए जाने के आरोप आंकड़ों के आधार पर सही हैं या नहीं।
कोर्ट ने माना कि चुनाव प्राधिकरण ने दोबारा मतगणना की अनुमति देकर कोई त्रुटि नहीं की और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत इस फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।
हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान पूरी हुई दोबारा मतगणना
ग्राम पंचायत सोदपुर में चुनाव तीन मतदान केंद्रों पर हुआ था। 14 जुलाई 2022 को संजय मालीवाल को सरपंच निर्वाचित घोषित किया गया। इसके बाद कविता ठाकुर ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए दोबारा मतगणना की मांग की। यह विवाद कई दौर की कानूनी कार्यवाही से गुजरते हुए चार साल से अधिक समय तक चलता रहा।
मौजूदा कार्यवाही के दौरान हाईकोर्ट ने मतों की दोबारा गिनती की अनुमति दी थी, लेकिन निर्देश दिया था कि परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा और उसे सीलबंद लिफाफे में रखा जाएगा। इसके बाद मतगणना पूरी हुई और उसका परिणाम संबंधित रिकॉर्ड के साथ कोर्ट के सामने पेश किया गया।
मालीवाल की ओर से दलील दी गई कि दोबारा मतगणना का आदेश देना चुनाव याचिका में मांगी गई अंतिम राहत को पहले ही प्रदान करने जैसा है। हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
कोर्ट ने कहा कि चुनाव प्राधिकरण ने चुनाव याचिका में उठाए गए मुद्दों पर निष्कर्ष दर्ज किए थे और मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताएं पाए जाने के बाद वास्तविक चुनाव परिणाम कानून के अनुसार निर्धारित करने के लिए दोबारा मतगणना का निर्देश दिया था। इसलिए मतगणना का निर्देश उन निष्कर्षों के परिणामस्वरूप दिया गया था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित आदेश में चुनाव का अंतिम परिणाम घोषित नहीं किया गया था।
मालीवाल ने कहा, केवल एक वोट का अंतर दोबारा मतगणना का आधार नहीं
संजय मालीवाल ने दोबारा मतगणना का विरोध करते हुए तर्क दिया कि जीत का अंतर कम होना अपने आप में वोटों की गिनती दोबारा कराने के लिए पर्याप्त नहीं है। उनके वकील ने कहा कि कविता ठाकुर के लिए यह जरूरी था कि वह ठोस अनियमितताओं का स्पष्ट आरोप लगाएं और प्रथम दृष्टया उन्हें साबित करें, तभी दोबारा मतगणना जैसे असाधारण उपाय का सहारा लिया जा सकता है।
यह भी दलील दी गई कि केवल संदेह दूर करने या बिना किसी ठोस आधार के जांच के लिए दोबारा मतगणना नहीं कराई जा सकती। मतपत्र की गोपनीयता का हवाला देते हुए कहा गया कि चुनाव परिणाम को चुनौती देने वाले उम्मीदवार को पहले कथित अनियमितताओं के समर्थन में पर्याप्त सामग्री पेश करनी होगी।
दूसरी ओर, कविता ठाकुर के वकीलों ने कहा कि मतगणना से जुड़ी ठोस अनियमितताएं साक्ष्यों से स्थापित की गई थीं। उन्होंने मालीवाल की जिरह का भी उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने स्वीकार किया था कि मतगणना के दौरान वह मतदान केंद्र के बाहर मौजूद थे और अंदर चल रही प्रक्रिया की उन्हें व्यक्तिगत जानकारी नहीं थी।
2022 से कई बार हाईकोर्ट पहुंचा चुनाव विवाद
कविता ठाकुर ने सबसे पहले 28 जुलाई 2022 को दोबारा मतगणना की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका 16 अगस्त 2022 को खारिज कर दी गई, हालांकि उन्हें उचित कानूनी उपाय अपनाने की स्वतंत्रता दी गई। इसके बाद उन्होंने सक्षम प्राधिकरण के समक्ष चुनाव याचिका दाखिल की।
प्राधिकरण ने 17 अप्रैल 2023 को मतों की दोबारा गिनती का आदेश दिया। मालीवाल ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 21 सितंबर 2023 को आदेश रद्द करते हुए मालीवाल को सुनवाई का अवसर देने के बाद नए सिरे से फैसला लेने के लिए मामला वापस भेज दिया।
इसके बाद चुनाव प्राधिकरण के सामने कार्यवाही जारी रही। गवाह पेश करने के लिए कई अवसर मिलने के बाद भी ऐसा नहीं किए जाने पर 26 जुलाई 2024 को मालीवाल का साक्ष्य पेश करने का अधिकार बंद कर दिया गया। उन्होंने इस आदेश को भी चुनौती दी।
11 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने एक बार फिर मामले को वापस भेजते हुए तय समय के भीतर साक्ष्य की प्रक्रिया पूरी करने के सख्त निर्देश दिए। इसके बाद प्राधिकरण ने 18 सितंबर 2025 को फिर से मतगणना कराने का आदेश दिया। 23 सितंबर 2025 को मतगणना की तारीख तय करने के लिए पत्र जारी किया गया। मालीवाल ने आदेश और पत्र दोनों को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
दोबारा मतगणना में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार
चुनाव में मतों की दोबारा गिनती से जुड़े कानूनी सिद्धांतों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि मामला केवल जीत के बेहद कम अंतर तक सीमित नहीं था। कोर्ट ने एक वोट के अंतर, 84 खारिज मतपत्रों और मतगणना में कथित अनियमितताओं से संबंधित सामग्री को भी ध्यान में रखा।
हाईकोर्ट ने कहा कि इन परिस्थितियों में मतपत्रों की भौतिक रूप से दोबारा गिनती यह तय करने का विश्वसनीय तरीका है कि मतों को गलत तरीके से स्वीकार या खारिज किए जाने के आरोप सही हैं या नहीं।
कोर्ट ने चुनाव प्राधिकरण के दोबारा मतगणना कराने के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई और उसमें हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने लंबे समय से जारी इस चुनावी विवाद का भी संज्ञान लिया। कोर्ट ने कहा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान मालीवाल अपने कार्यकाल के चार साल से अधिक पूरे कर चुके हैं और मतों की दोबारा गिनती भी अब पूरी हो चुकी है।

