जजों पर ‘अपमानजनक’ आरोप लगाने वाला वकील पुलिस की पकड़ से बाहर, सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को किया तलब

सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के जजों और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) की चुनाव समिति के खिलाफ कथित तौर पर “अपमानजनक और तुच्छ” आरोप लगाने वाले वकील मुकुट नाथ वर्मा के मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को सीधे निर्देश दिया है कि वह 23 फरवरी तक उक्त वकील की अदालत में पेशी सुनिश्चित करें।

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत और न्यायमूर्ति जॉयमलिया बागची की पीठ ने पुलिस को वकील की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए “कानूनी दंडात्मक उपाय” (lawful coercive measures) अपनाने की भी छूट दी है। यह निर्देश तब आया जब कोर्ट को सूचित किया गया कि स्थानीय पुलिस वकील के खिलाफ जारी जमानती वारंट को तामील करने में विफल रही है।

पुलिस वकील को खोजने में नाकाम

सुनवाई के दौरान, SCBA के अध्यक्ष विकास सिंह और चुनाव समिति के प्रमुख वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने पीठ को बताया कि दिल्ली पुलिस मुकुट नाथ वर्मा को ट्रेस करने और वारंट निष्पादित करने में असमर्थ रही है। पुलिस द्वारा कोर्ट में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि वकील का पता नहीं चल सका है। इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पीठ ने मामले को सीधे पुलिस कमिश्नर के स्तर पर भेज दिया।

मामला वर्मा द्वारा तिलक मार्ग पुलिस स्टेशन में दी गई एक शिकायत से जुड़ा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही “शर्मनाक और तुच्छ” करार दिया था। आरोप है कि वकील ने SCBA चुनाव कराने के लिए कोर्ट द्वारा नियुक्त चुनाव समिति और जजों के खिलाफ ही शिकायत दर्ज करा दी थी।

कोर्ट ने गौर किया कि पिछले साल 29 मई, 2025 को वर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए थे, जबकि उन्हें भौतिक रूप से (physically) उपस्थित होने का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। अब कोर्ट ने पुलिस को सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें 23 फरवरी को पेश करने का आदेश दिया है।

SCBA सुधारों पर भी चर्चा

वकील की पेशी के मुद्दे के साथ-साथ, कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) में सुधारों की मांग वाली 2023 की याचिका पर भी सुनवाई की। पीठ ने एसोसिएशन के सचिव प्रज्ञा बघेल को निर्देश दिया है कि वे बार बॉडी, रिटायर जस्टिस एल.एन. राव और वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया से प्राप्त सुझावों को एक सारणीबद्ध रूप (tabular form) में संकलित करें।

सुधारों के लिए प्रमुख प्रस्ताव:

  • कार्यकाल विस्तार: वरिष्ठ अधिवक्ता विजय हंसारिया ने सुझाव दिया कि SCBA प्रतिनिधियों का कार्यकाल मौजूदा एक साल से बढ़ाकर दो साल किया जाना चाहिए, जैसा कि सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAoRA) में है।
  • मतदाता सत्यापन: SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने वोटर लिस्ट से “गैर-वास्तविक सदस्यों” को हटाने पर जोर दिया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि सुप्रीम कोर्ट की बेंच के समक्ष वकीलों की भौतिक उपस्थिति को ही वोटिंग अधिकार का आधार बनाया जाए। इस संदर्भ में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक व्यक्ति जो कथित तौर पर ‘मैरिज ब्यूरो’ चला रहा था, वह भी SCBA का सदस्य बनकर वोट डालने के लिए पात्र हो गया था।
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पीठ ने कहा कि वह अगली सुनवाई पर इन संकलित सुझावों पर विचार करेगी और उचित निर्देश पारित करेगी।

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