मनी लॉन्ड्रिंग केस: सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार महेश लांगा की याचिका पर सुनवाई तीन महीने के लिए टाली, अब 7 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकार महेश लांगा द्वारा दाखिल एक याचिका पर सुनवाई तीन महीने के लिए स्थगित कर दी। यह मामला अहमदाबाद में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग केस से जुड़ा है, जिसमें लांगा आरोपी हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने यह मामला 7 अप्रैल तक के लिए टाल दिया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, जो ईडी की ओर से पेश हुए, ने अदालत को बताया कि विशेष अदालत में ट्रायल चल रहा है और कुछ समय दिया जाए।

लांगा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ को सूचित किया कि पत्रकार ट्रायल कोर्ट के समक्ष पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं।

इससे पहले 15 दिसंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने लांगा को अंतरिम जमानत दी थी और उनके खिलाफ मामले में दैनिक सुनवाई का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने कुछ सख्त शर्तें भी लगाई थीं—जिसमें यह निर्देश शामिल था कि जब तक मामला विचाराधीन है, लांगा इस केस पर किसी भी मीडिया प्लेटफॉर्म पर लेख नहीं लिख सकते, और वे विशेष अदालत से किसी भी प्रकार की स्थगन की मांग नहीं करेंगे

अब तक इस मामले में आरोप तय नहीं हुए हैं। ईडी ने कोर्ट में बताया है कि इस केस में कुल नौ गवाहों के नाम शामिल किए गए हैं।

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महेश लांगा को पहले अक्टूबर 2024 में एक GST धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें 25 फरवरी 2025 को प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया।

यह मामला अहमदाबाद पुलिस द्वारा दर्ज दो एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें लांगा पर धोखाधड़ी, आपराधिक गबन, आपराधिक विश्वासभंग, धोखाधड़ी के जरिए गलत लाभ उठाने और लोगों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं।

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31 जुलाई 2025 को गुजरात हाईकोर्ट ने लांगा की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी थी, यह कहते हुए कि अगर उन्हें जमानत दी जाती है तो यह प्रॉसिक्यूशन के केस को नुकसान पहुंचा सकता है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। पत्रकार के खिलाफ दर्ज इस हाई-प्रोफाइल मामले को लेकर प्रेस स्वतंत्रता बनाम न्यायिक प्रक्रिया के बीच संतुलन की भी बहस जारी है।

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