तमिलनाडु में 45,000 वितरण ट्रांसफार्मरों की खरीद में हुई कथित अनियमितताओं के मामले में मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा आदेश जारी किया है। हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया है। यह मामला 2021 से 2023 के बीच हुई खरीद से जुड़ा है, जिसमें आरोप है कि सरकारी खजाने को लगभग 397 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
चीफ जस्टिस एस.ए. धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुलमुरुगन की खंडपीठ ने सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) को आदेश दिया कि वह इस मामले से संबंधित सभी दस्तावेज दो सप्ताह के भीतर केंद्रीय एजेंसी को सौंप दे।
इस मामले में कोर्ट के समक्ष कई याचिकाएं दायर की गई थीं। एनजीओ ‘अरप्पोर इयक्कम’ ने जहां विशेष जांच दल (SIT) से जांच की मांग की थी, वहीं अन्नाद्रमुक (AIADMK) के कानूनी विंग के पदाधिकारियों, ई. सरवनन और राजकुमार ने सीधे तौर पर CBI जांच की अपील की थी।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जब सेंथिल बालाजी द्रमुक (DMK) सरकार में बिजली मंत्री थे, तब 45,000 ट्रांसफार्मरों की खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय धांधली हुई। इन शिकायतों के अनुसार, अनुबंधों के आवंटन में नियमों की अनदेखी और बढ़ी हुई कीमतों के कारण सरकारी खजाने को 397 करोड़ रुपये की चपत लगी।
याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने माना कि खरीद प्रक्रिया की सच्चाई सामने लाने के लिए एक नई और स्वतंत्र जांच की आवश्यकता है।
हाईकोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए:
- मामले का स्थानांतरण: DVAC के पास मौजूद सभी शिकायतों और दस्तावेजों को 14 दिनों के भीतर CBI के हवाले करना होगा।
- त्वरित जांच: CBI को इस मामले की नए सिरे से जांच शुरू करने और इसे जल्द से जल्द (expeditiously) पूरा कर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
- राज्य का सहयोग: कोर्ट ने स्पष्ट रूप से तमिलनाडु सरकार, DVAC और तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉर्पोरेशन (TANGEDCO) को आदेश दिया कि वे जांच के दौरान CBI को अपना पूरा सहयोग प्रदान करें।
यह फैसला इस मामले की जांच को राज्य की एजेंसियों से हटाकर केंद्रीय एजेंसी को सौंपता है, जो सार्वजनिक धन के खर्च में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में हाईकोर्ट की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

