कोयला आवंटन मामला: सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश, मुकदमों पर न लगाएं अंतरिम रोक, चार हफ्ते में करें याचिकाओं का निस्तारण

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट को निर्देश दिया है कि वह कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले से जुड़े मुकदमों की सुनवाई पर कोई अंतरिम रोक न लगाए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट से कहा है कि वह आरोपियों की लंबित याचिकाओं का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर चार सप्ताह के भीतर करे, ताकि उनके कानूनी अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश उस समय जारी किया, जब अदालत के संज्ञान में लाया गया कि कुछ मामलों में आरोपी हाईकोर्ट पहुंचे हैं, जबकि अन्य मामलों में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने किसी भी मामले के गुण-दोष पर अपनी कोई राय व्यक्त नहीं की है।

याचिकाओं के त्वरित निस्तारण का निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा मुकदमों पर कोई अंतरिम स्टे नहीं दिया जा सकता। हालांकि, यह ध्यान में रखते हुए कि सुनवाई न रुकने से आरोपियों के अधिकारों को नुकसान पहुंच सकता है, हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वह ऐसी याचिकाओं पर अधिमानतः चार सप्ताह के भीतर फैसला सुनाए।

अपील प्रक्रिया में ढील और पृष्ठभूमि

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यह कदम सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले महीने अपने करीब 12 साल पुराने आदेश में संशोधन करने के बाद आया है। पूर्व के आदेश के तहत विशेष अदालत के फैसलों के खिलाफ सीधे शीर्ष अदालत में ही याचिका दायर करने की अनिवार्यता थी। इसमें ढील दिए जाने के बाद अब अभियोजन पक्ष और आरोपी, दोनों ही विशेष सीबीआई जज द्वारा दिए गए दोषसिद्धि या बरी किए जाने के फैसलों को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दे सकते हैं।

इससे पहले 4 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर पुनर्विचार करने की बात कही थी, जिनमें हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर लगी रोक हटाने की मांग की गई थी। आरोपियों की ओर से लगातार यह शिकायत की जा रही थी कि अपील के एक स्तर से वंचित होने के कारण उनके बचाव पक्ष को गंभीर नुकसान हो रहा है।

2014 का फैसला और मामलों का दायरा

मामले की पृष्ठभूमि में, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार द्वारा 1993 से 2010 के बीच आवंटित 214 कोयला ब्लॉकों को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही मामलों की सुनवाई के लिए एक विशेष सीबीआई अदालत का गठन किया गया था।

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वर्ष 2014 से 2017 के बीच सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी कर हाईकोर्ट को जमानत, आरोप तय करने या मामला रद्द करने से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई से रोक दिया था। इस पाबंदी का मुख्य उद्देश्य आरोपियों द्वारा बार-बार अपील दायर कर मुकदमे में देरी करने की कोशिशों को रोकना था।

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कोयला आवंटन में हुई अनियमितताओं से जुड़े कुल 57 मामले दर्ज किए हैं, जिनके आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग के भी कई अनुषंगी मामले दर्ज किए गए हैं।

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