सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत वेतन सीमा बढ़ाने की मांग वाली याचिका पर आगे विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय कैबिनेट पहले ही अनिवार्य EPFO कवरेज के लिए मासिक वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने को मंजूरी दे चुकी है और अब सरकार से इसके बाद की जरूरी प्रक्रिया पूरी करने की उम्मीद है।
जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 2014 से ₹15,000 प्रति माह पर बनी हुई वेतन सीमा को तत्काल संशोधित करने की मांग की गई थी।
पीठ ने कहा कि कैबिनेट के फैसले को देखते हुए अब रिट याचिका में आगे विचार करने के लिए कुछ नहीं बचा है और संबंधित प्राधिकरण आवश्यक कदम उठाएंगे।
नोटिफिकेशन जारी नहीं होने की बात कोर्ट के सामने रखी गई
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि कैबिनेट के फैसले के बावजूद अभी तक इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है।
इस दलील का संज्ञान लेते हुए पीठ ने कहा कि कैबिनेट के निर्णय के बाद संबंधित पक्षों द्वारा आगे की जरूरी कार्रवाई किए जाने की उम्मीद है, इसलिए याचिका पर अब और विचार करने की आवश्यकता नहीं है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने समाचार पत्रों में प्रकाशित कैबिनेट के फैसले का भी उल्लेख किया और कहा कि सरकार इसे नोटिफाई करेगी।
16 सितंबर को कैबिनेट ने बढ़ाई वेतन सीमा
केंद्र सरकार ने 16 सितंबर को अनिवार्य EPFO कवरेज के लिए वेतन सीमा ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य अधिक कर्मचारियों को भविष्य निधि बचत और पेंशन सुरक्षा के दायरे में लाना है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 16 सितंबर को प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि भविष्य निधि कटौती के लिए नई वेतन सीमा ₹25,000 प्रति माह होगी।
उन्होंने कहा था कि इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य EPFO कवरेज के दायरे में आने की उम्मीद है, जिससे कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ेगा।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा था कि संशोधित वेतन सीमा विश्वकर्मा दिवस यानी 17 सितंबर से प्रभावी होगी।
भविष्य में वेतन सीमा संशोधन के लिए तय व्यवस्था की भी थी मांग
याचिका में केवल मौजूदा वेतन सीमा बढ़ाने की मांग नहीं की गई थी। केंद्र और कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को भविष्य में वेतन सीमा में संशोधन के लिए एक गतिशील फॉर्मूला या वस्तुनिष्ठ मानदंड तैयार करने और लागू करने का निर्देश देने की भी मांग की गई थी।
इसके अलावा, वेतन सीमा की हर साल समय-समय पर समीक्षा के लिए अनिवार्य तंत्र बनाने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि इसके लिए न्यूनतम मजदूरी, महंगाई, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, आयकर छूट की सीमा और प्रति व्यक्ति शुद्ध राष्ट्रीय आय जैसे आर्थिक संकेतकों को आधार बनाया जा सकता है।
EPFO की वेतन सीमा 2004 से 2014 तक नहीं बदली थी। सितंबर 2014 में इसे बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह किया गया था और उसके बाद से यह इसी स्तर पर बनी हुई थी।

