एसिड अटैक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: सजा बढ़ाने और आरोपी पर ‘बेगुनाही’ साबित करने का बोझ डालने का सुझाव

देश में एसिड अटैक (तेजाब हमलों) की बढ़ती घटनाओं को “बर्बर” और “चिंताजनक” बताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कानून में कड़े बदलाव करने का सुझाव दिया है। सोमवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए न केवल सजा बढ़ाई जानी चाहिए, बल्कि बेगुनाही साबित करने की जिम्मेदारी (burden of proof) भी आरोपी पर होनी चाहिए। इसके साथ ही, कोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के दायरे को बढ़ाते हुए इसमें उन लोगों को भी शामिल करने का निर्देश दिया है जो आंतरिक चोटों का शिकार होते हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि मौजूदा दंडात्मक प्रावधान अपराधियों के मन में डर पैदा करने में विफल रहे हैं। चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की कि 2013 के बाद से तेजाब हमलों के मामलों में “खतरनाक वृद्धि” देखी गई है, जो कि एक गंभीर मुद्दा है।

कोर्ट ने सुझाव दिया कि एसिड अटैक के मामलों को ‘दहेज मृत्यु’ (dowry death) के कानूनी प्रावधानों की तर्ज पर देखा जाना चाहिए, जहां आरोपी को खुद को निर्दोष साबित करना पड़ता है। सामान्य आपराधिक मामलों में अभियोजन पक्ष को दोष साबित करना होता है, लेकिन कोर्ट का मानना है कि इस बदलाव से न्याय प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी। इसके अलावा, कोर्ट ने दोषियों की संपत्ति कुर्क कर उससे पीड़ितों को मुआवजा देने का भी प्रस्ताव रखा।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ के तहत एक बड़ी कानूनी खामी को दूर किया। कोर्ट के संज्ञान में लाया गया कि जिन पीड़ितों को जबरन तेजाब पिलाया जाता है और जिनके आंतरिक अंगों को गंभीर क्षति पहुँचती है, उन्हें अक्सर बाहरी विकृति (disfigurement) न होने के कारण ‘एसिड अटैक विक्टिम’ की श्रेणी से बाहर रखा जाता है।

इस पर पीठ ने निर्देश दिया कि कानून में औपचारिक संशोधन होने तक, आंतरिक चोटों से जूझ रहे ऐसे सभी पीड़ितों को 2016 के अधिनियम के दायरे में माना जाएगा। यह स्पष्टीकरण कानून के लागू होने के समय से ही प्रभावी माना जाएगा, ताकि ऐसे पीड़ित तत्काल सरकारी कल्याणकारी योजनाओं और चिकित्सा सहायता का लाभ उठा सकें।

यह पूरा मामला एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) के माध्यम से सामने आया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने अदालती कार्यवाही में होने वाली देरी पर भी नाराजगी जताई और इसे “सिस्टम का मजाक” करार दिया।

बेंच ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए:

  • सभी हाईकोर्ट को निर्देश दिया गया है कि वे ट्रायल कोर्ट के लिए समय-सीमा तय करें ताकि एसिड अटैक के मामलों का निपटारा जल्द से जल्द हो सके।
  • सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से लंबित मामलों की वर्तमान स्थिति और पीड़ितों के पुनर्वास के लिए उठाए गए कदमों का विवरण मांगा गया है।
  • बाजार में तेजाब की खुलेआम बिक्री पर सख्त नियंत्रण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
READ ALSO  Adani-Hindenburg row: SC to hear SEBI's plea on extension of probe time on Tuesday

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को सूचित किया कि संबंधित मंत्रालय पहले से ही 2016 के अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने पर विचार कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद होगी।

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles