सोनम वांगचुक की NSA निरुद्धता: सुप्रीम कोर्ट वीडियो रिकॉर्डिंग देखेगा; पत्नी का आरोप—सिर्फ थंबनेल दिखाए गए, वीडियो नहीं दिए गए

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत निरुद्धता से जुड़े प्रक्रियात्मक मुद्दों पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह संबंधित वीडियो सामग्री, जिसमें पुलिस अधिकारियों और निरुद्ध व्यक्ति के बीच हुई बातचीत की 40 मिनट की रिकॉर्डिंग भी शामिल है, का अवलोकन करेगा। मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को तय की गई है।

निरुद्धता को चुनौती देते हुए दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. अंगमो की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि जिन चार वीडियो के आधार पर निरुद्धता की गई, वे वांगचुक को उपलब्ध नहीं कराए गए। उनके अनुसार केवल एक पेन ड्राइव लगाकर थंबनेल दिखाए गए, वीडियो चलाकर नहीं दिखाए गए।

सिब्बल ने कहा कि यह वांगचुक के लिए सरकार और सलाहकार बोर्ड के समक्ष प्रभावी प्रतिवेदन देने के अधिकार का उल्लंघन है। उन्होंने कहा:

“मान लीजिए कि उन्होंने दिखाया भी हो, तो वह कानून की आवश्यकता नहीं है। कानून की आवश्यकता है कि मुझे दस्तावेज दिया जाए। यह उनका संवैधानिक दायित्व है कि वे सामग्री उपलब्ध कराएं।”

उनके साथ मौजूद अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पेन ड्राइव लगाने पर केवल थंबनेल दिखाई दिए, किसी वीडियो को क्लिक कर चलाया नहीं गया।

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केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज ने कहा कि डीआईजी और निरुद्ध व्यक्ति के बीच हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग से पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। पीठ ने कहा कि वह रिकॉर्डिंग देखने के बाद आगे विचार करेगी।

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा प्रस्तुत वीडियो ट्रांसक्रिप्ट की शुद्धता पर प्रश्न उठाते हुए कहा था कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता के युग में अनुवाद सटीक होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि वांगचुक के वास्तविक वक्तव्यों के ट्रांसक्रिप्ट प्रस्तुत किए जाएं, क्योंकि याचिकाकर्ता का कहना था कि कुछ शब्द उनके बयान के रूप में गलत तरीके से दर्शाए गए हैं।

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याचिका में वांगचुक की NSA के तहत निरुद्धता को अवैध घोषित करने की मांग की गई है। अधिनियम के तहत किसी व्यक्ति को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रतिकूल गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से अधिकतम 12 महीने तक निरुद्ध किया जा सकता है, हालांकि उसे समय से पहले निरस्त भी किया जा सकता है।

अंगमो का कहना है कि 24 सितंबर को लेह में हुई हिंसा का वांगचुक से कोई संबंध नहीं है और उन्होंने स्वयं सोशल मीडिया पर इसकी निंदा करते हुए कहा था कि इससे लद्दाख के शांतिपूर्ण आंदोलन को नुकसान होगा।

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अब सुप्रीम कोर्ट वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद 23 फरवरी को मामले की आगे सुनवाई करेगा।

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