समाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल में कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखने के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलि अंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट इस याचिका पर रविवार को सुनवाई करने जा रहा है। याचिका में वांगचुक को अस्पताल से तुरंत छुट्टी देने और पुलिस की इस कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है।
दिल्ली पुलिस ने शनिवार तड़के वांगचुक को जंतर-मंतर पर उनके धरना स्थल से जबरन हटा दिया था। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस के नए कमिश्नर के पदभार संभालने के ठीक एक दिन बाद और सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से दो दिन पहले की गई। वांगचुक और उनके कार्यकर्ता समूह ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) ने संसद सत्र के शुरू होने पर संसद मार्च निकालने की योजना बनाई थी।
कोर्ट के पुराने आदेश का गलत इस्तेमाल करने का आरोप
गीतांजलि अंगमो ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट के 15 जुलाई के एक आदेश का गलत फायदा उठाते हुए वांगचुक को उनकी सहमति के बिना वहां से हटाया है। बता दें कि 15 जुलाई को हाईकोर्ट ने केवल सरकारी डॉक्टरों को वांगचुक के स्वास्थ्य की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह के आधार पर कदम उठाने का निर्देश दिया था।
याचिका के अनुसार, प्रशासन इलाज के बहाने वांगचुक को अस्पताल में अकेले (सॉलिटरी कंफाइनमेंट) रख रहा है। अंगमो ने बताया कि उन्हें अपने पति से मिलने की अनुमति तो दी गई, लेकिन बैठक के दौरान फोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने पर रोक लगा दी गई। इसके अलावा, वांगचुक को उनके कानूनी सलाहकारों और पिछले 20 दिनों से उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों से भी मिलने नहीं दिया जा रहा है।
पोटैशियम रिपोर्ट में विसंगति और पारदर्शिता की कमी
अदालत जाने से पहले गीतांजलि अंगमो ने सफदरजंग अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को पत्र लिखकर मांग की थी कि उनकी सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी ओरल या ड्रिप के जरिए तरल पदार्थ न दिया जाए। अस्पताल ने दावा किया था कि वांगचुक का पोटैशियम स्तर गिरकर 2.9 एमजी हो गया है, जबकि एक रात पहले यह सामान्य था। पोटैशियम का स्तर गिरने से मांसपेशियों और तंत्रिकाओं (नसों) के कामकाज पर असर पड़ सकता है।
याचिका के मुताबिक, अंगमो ने स्वतंत्र जांच के लिए रक्त का नमूना मांगा था, जिसे देने में अस्पताल ने करीब 10 घंटे की देरी की। बाद में स्वतंत्र जांच में वांगचुक का पोटैशियम स्तर 3.6 एमजी (सामान्य स्तर) पाया गया, जो अस्पताल के 2.9 एमजी के दावे के विपरीत था। अंगमो का आरोप है कि अस्पताल ने वांगचुक की मेडिकल रिपोर्ट देने से साफ इनकार कर दिया है और इस पारदर्शिता की कमी के कारण उन्हें वांगचुक को अस्पताल से छुट्टी दिलाने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मौलिक अधिकारों के हनन का तर्क
याचिका में तर्क दिया गया है कि किसी भी न्यायिक आदेश की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती जो किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों को खत्म या कमजोर करती हो। अंगमो ने इस बात पर जोर दिया है कि ‘निगरानी’, ‘इलाज’ या ‘चिकित्सकीय हस्तक्षेप’ जैसे शब्दों का विस्तार करके कार्यपालिका किसी व्यक्ति को जबरन बंधक नहीं बना सकती और न ही उसकी शारीरिक स्वतंत्रता को छीन सकती है।
याचिकाकर्ता ने दिल्ली हाईकोर्ट से मांग की है कि वांगचुक को तुरंत सफदरजंग अस्पताल से छुट्टी दी जाए और उन्हें उनके व परिवार की पसंद के किसी अन्य चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित करने की अनुमति दी जाए।

