20 लाख वकीलों के सामने भुखमरी जैसे हालात

लॉ ट्रेंड डेस्क-कोरोना महामारी के कारण देश के हर नागरिकों को किसी न किसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। सरकार द्वारा लॉकडाउन लगाने के बाद अधिवक्ताओं के सामने रोजी रोटी का संकट गहरा गया है। लगभग 20 लाख वकीलों की आजीविका कोर्ट की कानूनी कार्यवाही पर निर्भर है। इस लॉकडाउन की वजह से देश भर की लोअर कोर्ट सीमित तरीकों से कामकाज कर रही हैं।लॉकडाउन के कारण 20 हजार करोड़ की लीगल प्रैक्टिस इंडस्ट्री पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

देश की सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए कामयाब और सीनियर एडवोकेट की मांग बनी हुई है। लेकिन जूनियर वकीलों को ये सहूलियत इस तरह से हासिल नही है। 

बार कॉउन्सिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा ने कहा कि आपातकाल परिस्थितियों में थोड़े वक्त के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये वर्चुअल कोर्ट का काम चलाना अपरिहार्य है। लेकिन खुले कोर्ट में काम जल्द शुरू करना होगा। बड़े शहरों में वकालत करने वकीलों के खाने के लाले पड़ रहे हैं। कोर्ट को लंबे समय तक बंद नही रखा जा सकता। अधिकांश वकीलों के पास न तो कोई काम है न कोई कमाई का जरिया। 

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