SC/ST एक्ट के तहत दर्ज FIR रद्द करने के तेलंगाना हाईकोर्ट  के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा; कहा—प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी, जिसमें वर्ष 2016 में तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के विरुद्ध SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के तहत दर्ज FIR को रद्द कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने मामले के तथ्यों का सूक्ष्म परीक्षण कर यह पाया कि रेड्डी के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट का दृष्टिकोण तथ्यों और परिस्थितियों में “पूरी तरह उचित” और अधिक संभाव्य प्रतीत होता है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि वह मुख्यमंत्री को “क्लीन चिट” नहीं दे रही है, बल्कि केवल हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप का कोई कारण नहीं पाती।

पीठ ने यह भी कहा कि राजनीतिक लड़ाइयाँ अदालतों में नहीं लड़ी जानी चाहिए।

वर्ष 2016 में गाचीबौली थाने में दर्ज FIR में रेवंत रेड्डी को आरोपी संख्या-3 बनाया गया था। शिकायतकर्ता, जो सुप्रीम कोर्ट म्यूचुअली एडेड कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड से जुड़ा था, ने आरोप लगाया था कि रेड्डी के उकसाने पर उनके भाई और अन्य लोगों ने गोपनपल्ली गाँव में सोसाइटी की भूमि पर अतिक्रमण करने के उद्देश्य से दो कमरों को अर्थ-मूविंग मशीन से गिरा दिया। यह भी आरोप था कि शिकायतकर्ता के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियाँ की गईं।

रेड्डी ने वर्ष 2020 में हाईकोर्ट का रुख कर आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी, यह कहते हुए कि वह कथित घटना स्थल पर मौजूद ही नहीं थे।

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17 जुलाई पिछले वर्ष को हाईकोर्ट ने FIR रद्द करते हुए कहा था कि अभियोजन पक्ष कोई ऐसा साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जो आरोपी को घटना से जोड़ता हो।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री का विस्तार से परीक्षण कर यह निष्कर्ष निकाला कि रेड्डी के विरुद्ध प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता।

मुख्यमंत्री की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता “साहसिक वादी” है और उसने पूर्व में उस हाईकोर्ट के न्यायाधीश के विरुद्ध भी आरोप लगाए थे, जिन्होंने रेड्डी के पक्ष में आदेश पारित किया था।

मामले के पूर्व चरण में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश के खिलाफ किए गए “निंदनीय और अपमानजनक” आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया था। हालांकि बाद में याचिकाकर्ता एन. पेड्डी राजू और दो अधिवक्ताओं द्वारा बिना शर्त माफी मांगने पर अवमानना कार्यवाही समाप्त कर दी गई, जिसे संबंधित न्यायाधीश ने स्वीकार कर लिया था। अदालत ने चेतावनी दी थी कि इस प्रकार का आचरण न्यायिक प्रणाली की गरिमा को कमजोर करता है और इसकी “कड़ी निंदा” की जानी चाहिए।

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अपील खारिज होने के साथ ही मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के विरुद्ध दर्ज FIR को रद्द करने का तेलंगाना हाईकोर्ट का आदेश यथावत बना रहेगा।

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