सुप्रीम कोर्ट ने दिमागी रूप से अस्वस्थ्य युवती के साथ दुष्कर्म के आरोपी की सजा को बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने दिमागी रूप से अस्वस्थ्य युवती के साथ रेप करने वाले आरोपी को सजा को बरकरार रखते हुए कहा कि दिमागी तौर से पीड़ित लोगों का शोषण नही होना चाहिए । उन्हें अच्छे देखभाल और स्नेह की आवश्यकता होती है।

सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2016 के हिमांचल हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को खारिज करते हुए कहा कि आरोपी युवक ने युवती की मानसिक स्थिति का फायदा उठाते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया है। दरसल हिमांचल हाई कोर्ट ने आरोपी को रिहा करने के लोअर कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया  था।

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली बेंच ने अपने फैसले में कहा कि डीएनए रिपोर्ट के अनुसार 19 वर्षीय रेप पीड़िता ने जिस बच्चे को जन्म दिया है उसका जैविक पिता आरोपी युवक ही है।यह मामला जब प्रकाश में आया उस वक्त पीड़ित युवती को 31 हफ़्तों का गर्भधारण  किये हुए थी।

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पीठ ने कहा कि साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट हो चुका है की पीड़ित युवती मानसिक तौर पर विकसित नही है। उसका आई क्यू लेवल 62 है और वह यौन उत्पीड़न को समझने की स्थिति में नही है।

पुलिस के अनुसार पीड़ित युवती के पिता ने वर्ष 2008 को एफआईआर दर्ज करवाई थी जिसमे कहा गया था कि उनकी बेटी गर्भवती है और उसने अपनी माँ को बताया कि आरोपी ने उसके साथ रेप तब किया जब वह मवेशियों को चराने के लिए गई हुई थी। युवती ने जून 2008 में संतान को जन्म दिया था।

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