सुप्रीम कोर्ट ने हाईवे के पास शराब की दुकानों को हटाने के राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाई; कहा– सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता वाजिब

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि वह नेशनल और स्टेट हाईवे से 500 मीटर के दायरे में आने वाली सभी शराब की दुकानों को हटाए या स्थानांतरित करे। हाईकोर्ट ने यह आदेश राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में शराब की भूमिका को देखते हुए दिया था।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान सरकार और शराब विक्रेताओं की ओर से दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए कहा, “नोटिस जारी किया जाता है। impugned order (हाईकोर्ट के आदेश) के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक लगाई जाती है।”

हालांकि पीठ ने यह भी कहा कि “हाईकोर्ट की चिंता वाजिब थी” और राज्य सरकार भविष्य में अपनी शराब नीति तय करते समय इस पर विचार कर सकती है।

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने 24 नवंबर 2025 को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि हाईवे से 500 मीटर के दायरे में स्थित सभी शराब की दुकानों को दो महीने के भीतर हटा दिया जाए, चाहे वे किसी नगर निगम, स्थानीय निकाय या विकास प्राधिकरण क्षेत्र में आती हों।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू (2016) फैसले का हवाला दिया जिसमें हाईवे से 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानें प्रतिबंधित की गई थीं। हालांकि 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नगर क्षेत्र (municipal limits) में यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा और राज्यों को स्थानीय निकायों के संदर्भ में विवेकाधीन छूट दी गई थी।

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राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में एक हलफनामा दायर कर बताया था कि कुल 1,102 शराब की दुकानें हाईवे के किनारे हैं, लेकिन वे नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं और राज्य को इससे ₹2,221.78 करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है।

इस पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “सार्वजनिक जीवन और सुरक्षा की संवैधानिक प्राथमिकता को केवल राजस्व के नाम पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य सरकार की ओर से पेश होते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई स्पष्ट छूट की गलत व्याख्या की है। “बाद में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि नगरपालिका क्षेत्र में शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा,” उन्होंने कहा।

शराब विक्रेताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने हाईकोर्ट के आदेश को एकतरफा और त्रुटिपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने केवल सुजानगढ़ गांव से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर पूरे राज्य के लिए आदेश पारित कर दिया और संबंधित पक्षों को सुने बिना यह फैसला सुना दिया।

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इस पर न्यायमूर्ति मेहता ने कहा कि हाईकोर्ट की क्षेत्राधिकार पूरे राज्य में लागू होता है, लेकिन अंततः पीठ ने आदेश पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी कर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में राज्य सरकार पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई सीमित छूट के “दुरुपयोग” का आरोप लगाया था और कहा था कि “सड़क सुरक्षा से जुड़ी शीर्ष अदालत की मंशा और दिशा-निर्देशों को इस तरह निष्प्रभावी करना स्वीकार्य नहीं है।”

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