कोलकाता मेट्रो परियोजना में ‘रोड़ा अटकाने’ पर सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को फटकारा, हाईकोर्ट को निगरानी का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना के एक महत्वपूर्ण कॉरिडोर के निर्माण में बाधा डालने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को फटकारा। अदालत ने राज्य सरकार को चेतावनी दी कि वे आम जनता के लाभ के लिए जुड़ी विकास परियोजनाओं का “राजनीतिकरण” न करें।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई थी। पीठ ने राज्य की देरी को “संवैधानिक कर्तव्य की पूर्ण अवहेलना” करार दिया और कलकत्ता हाईकोर्ट को परियोजना की सक्रिय निगरानी करने का निर्देश दिया ताकि इसे समय पर पूरा किया जा सके।

यह कानूनी विवाद साल्ट लेक के सेक्टर V (आईटी हब) को दक्षिण कोलकाता के विशाल क्षेत्रों से जोड़ने वाली मेट्रो लाइन से जुड़ा है। परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है, लेकिन ईएम बाईपास पर स्थित महत्वपूर्ण चिंगरीहाटा क्रॉसिंग पर काम लंबे समय से अटका हुआ है। इसका मुख्य कारण राज्य पुलिस द्वारा ट्रैफिक ब्लॉक की अनुमति न देना है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बंगाल सरकार के वकील से कहा, “हमें हर चीज का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। यह विकास का मुद्दा है और आम आदमी के लिए एक सुविधा है। इसमें रोड़े न अटकाएं।”

अदालत ने इस बात पर भी निराशा जताई कि एक लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार जनहित को नजरअंदाज करने की मांग लेकर अदालत आई है। जस्टिस बागची ने टिप्पणी की, “हम इसकी सराहना नहीं करते कि एक चुनी हुई सरकार अदालत का दरवाजा खटखटाए और कहे कि इसे (विकास को) नजरअंदाज कर दिया जाए।”

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पश्चिम बंगाल सरकार ने आगामी चुनावों की आदर्श आचार संहिता (MCC) और बोर्ड परीक्षाओं का हवाला देते हुए परियोजना को मई 2026 तक टालने की मांग की थी। हालांकि, पीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि हाईकोर्ट का मूल आदेश 23 दिसंबर, 2025 का है।

सीजेआई ने सवाल किया, “तब से राज्य सरकार को निर्देशों का पालन करने से किसने रोका था?”

जस्टिस बागची ने स्पष्ट किया कि भारतीय चुनाव आयोग (ECI) ऐसी विकास परियोजना पर आपत्ति नहीं कर सकता जो पहले से चल रही है और जिसकी निगरानी हाईकोर्ट द्वारा की जा रही है। उन्होंने कहा, “हम राज्य को विकास को रोकने के लिए इसे फिर से एक ‘हौआ’ (Bogey) बनाने की अनुमति नहीं देंगे।”

अदालत ने राज्य के उस तर्क को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि निर्माण से सड़कें बंद हो जाएंगी जिससे एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों को दिक्कत होगी। पीठ ने कहा कि यह केवल अधिकारियों के “अड़ियल रवैये” को दर्शाता है जो मेट्रो परियोजना में देरी करना चाहते हैं।

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कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले ही चिंगरीहाटा क्रॉसिंग पर काम रुकने पर चिंता जताई थी। 23 दिसंबर के अपने आदेश में हाईकोर्ट ने राज्य अधिकारियों को निर्देश दिया था कि:

  • वे 6 जनवरी तक मेट्रो रेलवे को सूचित करें कि ईएम बाईपास पर काम पूरा करने के लिए किन तीन दिनों का ट्रैफिक ब्लॉक दिया जाएगा।
  • ओवरहेड मेट्रो ट्रैक का निर्माण कार्य 15 फरवरी, 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट ने राज्य की अपील खारिज कर इस समय सीमा को प्रभावी रूप से बरकरार रखा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि कवि सुभाष से सेक्टर V को जोड़ने वाली इस मेट्रो लाइन के काम में अब कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए।

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