सुप्रीम कोर्ट ने आपसी समझौते के आधार पर रेप सहित दो एफआईआर रद्द की, कहा– मुकदमा चलाने से सिर्फ मानसिक कष्ट बढ़ेगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बलात्कार सहित गंभीर आरोपों वाली दो एफआईआर को रद्द कर दिया, यह देखते हुए कि दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौता हो चुका है और मुकदमा जारी रखना सिर्फ सभी पक्षों के लिए तनाव बढ़ाएगा और अदालतों पर अनावश्यक बोझ डालेगा।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने यह आदेश उस याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद पीठ के मार्च 2025 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें इन आपराधिक मामलों को रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि धारा 376 (बलात्कार) आईपीसी के तहत दर्ज मामला गंभीर और गैर-समझौता योग्य है।

पहली एफआईआर नवंबर 2023 में जलगांव जिले में मारपीट और गैरकानूनी जमावड़े के आरोप में दर्ज की गई थी। इसके अगले दिन दूसरी एफआईआर दर्ज हुई, जिसमें बलात्कार और आपराधिक धमकी जैसे आरोप जोड़े गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस घटनाक्रम का क्रम यह संकेत देता है कि दूसरी एफआईआर शायद प्रतिकारी कदम के रूप में दर्ज की गई थी।

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न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि दूसरी एफआईआर की शिकायतकर्ता ने मार्च 2024 में हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर यह स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहतीं। उन्होंने ₹5 लाख की राशि विवाह संबंधी खर्चों के रूप में प्राप्त करने और आपसी समझौते की बात स्वीकार की थी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अब विवाह कर चुकी हैं और अपने निजी जीवन में स्थिरता चाहती हैं।

पीठ ने कहा, “इस मुकदमे को जारी रखना किसी के लिए भी सार्थक नहीं होगा। यह विशेष रूप से शिकायतकर्ता के लिए मानसिक कष्ट को बढ़ाएगा और न्याय प्रणाली पर अनावश्यक बोझ डालेगा।”

हालांकि अदालत ने यह माना कि आईपीसी की धारा 376 के तहत दर्ज अपराध अत्यंत गंभीर और घृणित होते हैं, और आमतौर पर समझौते के आधार पर ऐसे मामलों की कार्यवाही रद्द नहीं की जाती, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत न्यायालय के पास न्यायहित में विशेष परिस्थितियों में कार्रवाई रद्द करने की शक्ति है।

इस मामले में, शिकायतकर्ता की स्पष्ट सहमति, आपसी समाधान और आगे मुकदमा न चलाने की इच्छा को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने दोनों एफआईआर को रद्द करने का आदेश पारित किया।

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