सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की याचिका पर HMT से जवाब मांगा; कलामस्सेरी में ‘ज्यूडिशियल सिटी’ के लिए 27 एकड़ जमीन लेने की अनुमति का अनुरोध

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केरल सरकार की उस अर्जी पर हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) और अन्य प्रतिवादियों से जवाब मांगा है, जिसमें राज्य ने कलामस्सेरी स्थित HMT की 27 एकड़ जमीन अपने कब्जे में लेने की अनुमति मांगी है, ताकि वहां प्रस्तावित ‘ज्यूडिशियल सिटी’ स्थापित की जा सके।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्य की अर्जी पर नोटिस जारी किया। यह आवेदन एक लंबित सिविल अपील में दायर किया गया है, जो 2014 के केरल हाई कोर्ट के उस फैसले से संबंधित है जिसमें जमीन की स्वामित्व और सीलिंग प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों का निर्णय हुआ था।

प्रस्तावित ‘ज्यूडिशियल सिटी’ में केरल हाई कोर्ट के न्यायिक प्रभाग सहित संबद्ध अवसंरचना विकसित की जानी है।

यह विवाद HMT द्वारा 2014 के हाई कोर्ट निर्णय को चुनौती देते हुए दायर सिविल अपील से जुड़ा है। 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर नोटिस जारी करते हुए संबंधित भूमि पर status quo बनाए रखने का निर्देश दिया था। यह अंतरिम आदेश अभी भी प्रभावी है।

राज्य सरकार ने अब पीठ से अनुरोध किया है कि status quo आदेश में सीमित संशोधन कर उसे 27 एकड़ भूमि अपने कब्जे में लेने की अनुमति दी जाए। सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि वह 2014 की Basic Valuation Report के आधार पर तय मुआवजा राशि राष्ट्रीयकृत बैंक में केरल हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के नाम पर Fixed Deposit Receipt (FDR) के रूप में जमा कर देगी।

कलामस्सेरी स्थित 900 एकड़ का यह भूमि बैंक 1960 के दशक में एक केंद्रीय क्षेत्र परियोजना के तौर पर मशीन टूल फैक्ट्री स्थापित करने के लिए अधिग्रहित किया गया था। समय के साथ इस भूमि का एक हिस्सा नौसेना आयुध डिपो और केरल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड जैसी एजेंसियों को हस्तांतरित किया गया, जबकि बड़ी मात्रा में जमीन HMT द्वारा अप्रयुक्त पड़ी रही।

राज्य ने लगभग 400 एकड़ भूमि को पुनः लेने का प्रयास किया, जिसके चलते लंबा मुकदमा चला और अंततः 2014 का हाई कोर्ट फैसला आया। हाई कोर्ट ने कहा था कि HMT को आवंटित भूमि पर केरल भूमि सुधार अधिनियम के तहत सीलिंग कार्यवाही लागू नहीं की जा सकती, क्योंकि यह मूल रूप से सरकारी भूमि थी और इसे वैधानिक कट-ऑफ तिथियों के बाद आवंटित किया गया था।

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अब सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिवादियों से जवाब मांग लिया है, जिसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।

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