हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास पेड़ों की कटाई पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, तत्काल रिपोर्ट तलब

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम कदम उठाते हुए तेलंगाना हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार को निर्देश दिया कि वह हैदराबाद विश्वविद्यालय के पास कंचा गच्चीबौली के जंगल क्षेत्र का तुरंत दौरा करें, जहां 400 एकड़ भूमि पर पेड़ों की कटाई का विवादित प्रस्ताव सामने आया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट में चल रही संबंधित कार्यवाही के संदर्भ में दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उसी दिन दोपहर 3:30 बजे तक हाईकोर्ट रजिस्ट्रार से अंतरिम रिपोर्ट मांगी है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार को यह आदेश तुरंत तेलंगाना हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार तक पहुंचाने का निर्देश दिया गया है, ताकि तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

इसके अलावा, पीठ ने तेलंगाना के मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि आदेश के अगले निर्देश तक संबंधित वन क्षेत्र में किसी भी प्रकार की पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। यह अंतरिम रोक ऐसे समय में आई है जब हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय चिंताओं को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज हो गया है।

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इस मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को ही दोपहर 3:45 बजे निर्धारित की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे की करीबी निगरानी कर रहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्यवाही तेलंगाना हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई पर रोक नहीं है।

यह न्यायिक हस्तक्षेप ऐसे समय में हुआ है जब तेलंगाना हाईकोर्ट पहले ही राज्य की कांग्रेस सरकार को 3 अप्रैल तक सभी संबंधित विकास कार्य रोकने का निर्देश दे चुकी है। यह आदेश पर्यावरण कार्यकर्ताओं और विश्वविद्यालय समुदाय की याचिकाओं और विरोधों के मद्देनज़र दिया गया था।

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यह मामला न केवल पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है, बल्कि यह भी दिखाता है कि विकास कार्यों के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी अब न्यायपालिका की गहन समीक्षा के दायरे में आ रही है।

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