सीजेआई ने बताया ‘धोखाधड़ी का नया तरीका’: सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा में उच्च जाति के बौद्ध धर्मांतरण पर अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र को लेकर जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले की सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि अब एक “नई तरह की धोखाधड़ी” देखने को मिल रही है, जिसमें समाज के प्रभुत्वशाली वर्ग के लोग केवल आरक्षण लाभ लेने के उद्देश्य से बौद्ध धर्म अपना रहे हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ हरियाणा के हिसार निवासी निखिल कुमार पुनिया की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पुनिया ने बौद्ध अल्पसंख्यक के रूप में प्रवेश पाने का दावा किया था।

सुनवाई के दौरान, मुख्य न्यायाधीश ने पुनिया के सामाजिक पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए पूछा:

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“आप पुनिया हैं? आप किस अल्पसंख्यक वर्ग से हैं? मैं स्पष्ट रूप से पूछ रहा हूं, आप किस पुनिया समुदाय से हैं?”

जब याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि वह ‘जाट पुनिया’ समुदाय से हैं, तो सीजेआई ने चौंकते हुए प्रतिक्रिया दी:

“वाह! यह तो धोखाधड़ी का नया तरीका है।”

वकील ने तर्क दिया कि धर्मांतरण उनका संवैधानिक अधिकार है, लेकिन कोर्ट ने पूछा कि क्या केवल धर्म बदलने भर से कोई व्यक्ति अल्पसंख्यक आरक्षण का लाभ ले सकता है, खासकर जब वह पहले सामान्य वर्ग का घोषित उम्मीदवार रहा हो और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) में भी न आता हो।

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कोर्ट ने हरियाणा के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह यह बताएं:

  • अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने के लिए राज्य सरकार के पास क्या दिशा-निर्देश हैं?
  • क्या कोई सामान्य वर्ग का उम्मीदवार, जो पहले EWS में नहीं आता था और सामान्य श्रेणी में आवेदन कर चुका है, केवल बौद्ध धर्म अपनाने के आधार पर अल्पसंख्यक लाभ का दावा कर सकता है?
  • ऐसे मामलों में प्रमाण पत्र जारी करने से पहले क्या जांच की जाती है?
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हालांकि कोर्ट ने पुनिया की याचिका खारिज कर दी, लेकिन उसने इस व्यापक मुद्दे पर राज्य सरकार की रिपोर्ट आने के बाद आगे सुनवाई करने की बात कही।

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