विधायिका कभी राजनीति से अपराधीकरण को मुक्त नही करेगी: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली—–सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें यकीन है कि विधायिका कभी राजनीति से अपराधीकरण को मुक्त नहीं करेगी। हम इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि निकट भविष्य में नहीं, बल्कि भविष्य में कभी वह ऐसा नहीं करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर अफसोस जताया कि किसी भी पार्टी को न तो राजनीति को अपराध से मुक्त करने के लिए कानून बनाने में और न ही उन उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोकने में दिलचस्पी है, जिनके विरूद्ध गंभीर अपराधों में कोर्ट ने आरोप निर्धारित किए हैं। पीठ ने कहा है कि इस मामले में सभी राजनीतिक दलों में विविधता में एकता है।

जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा है कि सरकार की विधायी शाखा कानून लाने पर कोई कदम उठाने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही है।

हालांकि, अब तक कुछ भी नहीं किया गया है और किसी भी पार्टी द्वारा कभी भी कुछ नहीं किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना के इस मामले में भाजपा, कांग्रेस, बसपा, लोजपा, माकपा और राकांपा सहित तमाम पक्षों के अधिवक्ताओ की दलीलों को भी सुना।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में आदेश देने के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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आपको बताते चलें कि पीठ अधिवक्ता ब्रजेश सिंह द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें 2020 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा फरवरी, 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर पालन नहीं करने का आरोप लगाया गया है।

फरवरी, 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि की जानकारी का व्यापक प्रकाशन करने के आदेश दिया था। बृजेश सिंह का कहना है कि कई पार्टियां अपने उम्मीदवारों के आपराधिक इतिहास के ब्योरे को सार्वजनिक करने में विफल रही हैं।

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