रेप केस में सजा काट रहे आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से मिली 20 दिन की पैरोल, जिला प्रशासन की आपत्तियों को बताया निराधार

नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे 85 वर्षीय स्वयंभू बाबा आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने सोमवार को आसाराम की 20 दिनों की पैरोल याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही अदालत ने जोधपुर जिला कलेक्टर की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा पैरोल अर्जी खारिज किए जाने के फैसले को आधारहीन करार देते हुए कड़ी फटकार लगाई।

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की पीठ ने आसाराम की अधिक उम्र और जेल में बिताई गई लंबी अवधि को देखते हुए यह राहत प्रदान की। अदालत ने उल्लेख किया कि आसाराम अब तक 13 साल, 1 महीना और 24 दिन की जेल काट चुके हैं। पैरोल पर रिहाई के लिए आसाराम को 50,000 रुपये का व्यक्तिगत मुचलका और 25,000-25,000 रुपये की दो प्रतिभूतियां जमा करनी होंगी। इसके अलावा, जोधपुर सेंट्रल जेल के अधीक्षक को आवश्यकतानुसार अन्य उचित शर्तें लगाने की छूट दी गई है।

प्रशासनिक समिति की आपत्तियों को बताया काल्पनिक

इससे पहले 31 जुलाई को जोधपुर जिला कलेक्टर की अगुवाई वाली समिति ने आसाराम की पैरोल अर्जी खारिज कर दी थी। समिति ने पुलिस की खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए उनके फरार होने की आशंका जताई थी। इसके अलावा, राजस्थान बंदी पैरोल नियम 1958 के नियम 14(ए) का हवाला देकर कहा गया था कि गुजरात के गांधीनगर में दोषी ठहराए जाने और अन्य राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज होने के कारण वह पैरोल के हकदार नहीं हैं। समिति ने इलाज कर रहे डॉक्टर की ओर से फिटनेस प्रमाणपत्र न मिलने और पीड़िता के परिवार की सुरक्षा पर मंडराते खतरे की बात भी कही थी।

हाईकोर्ट ने इन सभी तर्कों को भ्रामक और पूरी तरह काल्पनिक करार दिया। पीठ ने कहा कि आसाराम को पूर्व में भी अंतरिम जमानत मिली थी और इस दौरान उनके भागने, गवाहों को धमकाने या समाज के लिए खतरा पैदा करने की कोई घटना सामने नहीं आई। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पैरोल समितियां बिना किसी ठोस उदाहरण के अक्सर एक जैसी पुरानी दलीलों का सहारा लेकर याचिकाएं खारिज कर देती हैं।

मई में रद्द हुई थी जमानत

इससे पहले मई महीने में न्यायमूर्ति योगेंद्र कुमार पुरोहित और न्यायमूर्ति अरुण मोंगा की पीठ ने नाबालिग से रेप के मामले में आसाराम की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था, हालांकि उन्हें सामूहिक दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया गया था। उस समय आसाराम जमानत पर बाहर थे, जिसे अदालत ने तत्काल रद्द करते हुए उनके जमानत बांड जब्त करने और उन्हें आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था।

READ ALSO  कोर्ट ने वकील-पति को जज-पत्नी को भरण-पोषण का भुगतान करने का निर्देश दिया- जानिए पूरा मामला

मई के अपने निर्णय में पीठ ने कहा था कि घटना के समय आसाराम की उम्र 73 वर्ष थी, जो अब बढ़कर 86 वर्ष हो चुकी है। उम्र और बीमारियों की दुहाई देकर राहत की मांग को खारिज करते हुए अदालत ने साफ किया था कि शारीरिक लाचारी के आधार पर पीड़िता की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। न्याय की प्रक्रिया में ढील देने से समाज का न्याय प्रणाली पर से भरोसा उठ जाएगा।

READ ALSO  दिल्ली हाईकोर्ट ने मानहानि मामले में भाजपा नेता की याचिका पर मुख्यमंत्री आतिशी को नोटिस जारी किया
Ad 20- WhatsApp Banner

Law Trend
Law Trendhttps://lawtrend.in/
Legal News Website Providing Latest Judgments of Supreme Court and High Court

Related Articles

Latest Articles