पुणे पोर्शे दुर्घटना मामला: नाबालिग के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को 2024 के पुणे पोर्शे दुर्घटना मामले में नाबालिग आरोपी के पिता विशाल अग्रवाल की जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को 10 मार्च को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ बॉम्बे हाईकोर्ट के 16 दिसंबर 2025 के उस आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अग्रवाल की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

यह मामला 19 मई 2024 को पुणे के कल्याणी नगर क्षेत्र में हुई घटना से संबंधित है, जहां कथित रूप से शराब के नशे में पोर्शे कार चला रहे 17 वर्षीय नाबालिग ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मारकर उनकी मौत कर दी थी।

सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने अग्रवाल की जमानत याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। हाईकोर्ट ने इससे पहले रक्त नमूना बदलने के कथित मामले में अग्रवाल सहित कई आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

सुप्रीम कोर्ट इस प्रकरण से जुड़ी विभिन्न जमानत याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। 2 फरवरी को अदालत ने कथित बिचौलिए अमर संतोष गायकवाड़ तथा सह-आरोपी आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को जमानत दी थी। अदालत ने यह भी कहा था कि नाबालिगों से जुड़े मामलों में माता-पिता की जवाबदेही तय होती है, जब वे अपने बच्चों पर नियंत्रण नहीं रख पाते।

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इससे पहले 7 जनवरी और 23 जनवरी को भी अदालत ने अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।

सूद और मित्तल को 19 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया गया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कार में मौजूद दो नाबालिगों के स्थान पर उनके रक्त नमूनों का उपयोग जांच के लिए किया गया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को गायकवाड़, सूद और मित्तल सहित आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।

इस मामले में उस समय व्यापक आक्रोश फैल गया था जब किशोर न्याय बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को जमानत देते हुए सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों का निबंध लिखने जैसी शर्तें लगाई थीं। विरोध के बाद पुलिस ने आदेश की समीक्षा मांगी, जिसके बाद बोर्ड ने नाबालिग को प्रेक्षण गृह भेज दिया था। बाद में हाईकोर्ट ने जून 2024 में उसे रिहा करने का आदेश दिया।

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नाबालिग के अलावा उसके माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हलनोर, ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकंबले, सूद, मित्तल और अरुण कुमार सिंह सहित कुल 10 आरोपियों को कथित रक्त नमूना हेरफेर मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

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