पुणे पोर्शे दुर्घटना: सुप्रीम कोर्ट से तीन आरोपियों को जमानत मिलने पर मृतक इंजीनियर के परिजनों ने जताई नाराज़गी, कहा– समाज को गलत संदेश

2024 पुणे पोर्शे दुर्घटना में मारे गए इंजीनियर अनिश अवधीया के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा तीन आरोपियों को जमानत दिए जाने पर निराशा जताई है और कहा है कि इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने अमर संतोष गायकवाड़ (मध्यस्थ), आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को जमानत दी। ये तीनों उस कथित साजिश में शामिल थे जिसके तहत 17 वर्षीय किशोर मुख्य आरोपी को बचाने के लिए खून के नमूने बदलवाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की घटनाओं के लिए माता-पिता ज़िम्मेदार होते हैं, जो बच्चों पर नियंत्रण नहीं रख पाते।

मामले में सूद और मित्तल पर अपने बच्चों के खून के नमूनों की जगह देने और जालसाजी की साजिश रचने का आरोप है। मित्तल मुख्य आरोपी के पिता का मित्र है, जबकि सूद उस किशोर का पिता है जो कार की पिछली सीट पर बैठा था। अमर गायकवाड़ पर ₹3 लाख लेकर ब्लड रिपोर्ट में गड़बड़ी करवाने का आरोप है।

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अनिश के परिवार ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया। उनके दादा आत्माराम अवधीया ने कहा, “इतनी बड़ी घटना के बाद भी आरोपियों को जमानत मिल गई, ये बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। मुख्य आरोपी एक अमीर परिवार से है, इसलिए शुरू से ही उसे बचाने की कोशिश की गई।”

अनिश के पिता ओमप्रकाश अवधीया ने कहा, “जिन लोगों ने खून के नमूनों से छेड़छाड़ की, वे मुख्य आरोपी को बचाने के लिए ऐसा कर रहे थे। हम चाहते हैं कि इनकी जमानत रद्द हो।”

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यह घटना 19 मई 2024 की है जब पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 17 वर्षीय एक नाबालिग ने कथित रूप से शराब के नशे में पोर्शे कार चलाते हुए दो आईटी इंजीनियरों — अनिश अवधीया और अश्विनी कोश्टा — को कुचल दिया था।

जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने आरोपी किशोर को 300 शब्दों का रोड सेफ्टी पर निबंध लिखने जैसी शर्तों पर जमानत दी थी, जिससे देशभर में रोष फैल गया था। बाद में आदेश में बदलाव करते हुए बोर्ड ने किशोर को ऑब्ज़र्वेशन होम भेजा। हालांकि, जून 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया।

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खून के नमूने बदलने के मामले में अब तक 10 लोग जेल भेजे गए हैं, जिनमें किशोर के माता-पिता विशाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावरे और श्रीहरि हालनोर, अस्पताल कर्मचारी अतुल घाटकम्बले, सूद, मित्तल, अरुण कुमार सिंह और दो बिचौलिए शामिल हैं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिसंबर 2025 में गायकवाड़, सूद और मित्तल की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए जमानत दी है कि वे 18 महीने से जेल में हैं।

हालांकि, पीड़ित परिवार को डर है कि इस तरह की जमानतें न्याय की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती हैं।

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