पीएफआई के शिक्षा विंग के राष्ट्रीय प्रभारी की जमानत अर्जी खारिज, एनआईए कोर्ट ने कहा आरोप प्रथमदृष्टया गंभीर

विशेष एनआईए अदालत ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के शिक्षा विंग के राष्ट्रीय प्रभारी अशरफ उर्फ करमन्ना अशरफ मौलवी की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध सामग्री से प्रथमदृष्टया आरोप गंभीर और सत्य प्रतीत होते हैं।

एनआईए कोर्ट के न्यायाधीश एम.के. मोहंदास ने शुक्रवार को यह आदेश पारित किया। अशरफ पलक्कड़ में आरएसएस नेता श्रीनिवासन की हत्या समेत पीएफआई की कथित राष्ट्रविरोधी गतिविधियों से जुड़े मामले में दूसरे आरोपी हैं।

एनआईए ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि अशरफ ने कोच्चि के पेरियार वैली और तिरुवनंतपुरम स्थित त्रिवेंद्रम एजुकेशनल सर्विसेज ट्रस्ट (TEST) में पीएफआई कार्यकर्ताओं को हथियारों का प्रशिक्षण आयोजित किया, जो आतंकवादी गतिविधियों की तैयारी का हिस्सा था।

आदेश में संरक्षित गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए कहा गया कि अशरफ ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर 15वें आरोपी मोहम्मद मुबारक के माध्यम से हथियार प्रशिक्षण कराया। मुबारक के घर की तलाशी में 29 दिसंबर 2022 को तीन तलवारें और एक कुल्हाड़ी बरामद होने का उल्लेख किया गया।

एनआईए के अनुसार यह कुल्हाड़ी केरल के प्रोफेसर के हाथ काटने के मामले में प्रयुक्त हथियार जैसी थी।

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एजेंसी ने यह भी कहा कि अशरफ श्रीनिवासन हत्या साजिश में शामिल था और TEST, तिरुवनंतपुरम में भी प्रशिक्षण कराया गया।

एनआईए ने आरोप लगाया कि अशरफ ने आईएसआईएस विचारधारा का प्रचार करते हुए भाषण दिए और गवाहों को ‘काफिरों’ के खिलाफ जिहाद के लिए उकसाया। एजेंसी के अनुसार उसके घर से बरामद पेन ड्राइव में आईएसआईएस से संबंधित वीडियो, तस्वीरें, विभिन्न हत्या मामलों के आरोपियों के साथ वित्तीय लेनदेन के हस्तलिखित नोट्स, आरएसएस और अन्य हिंदू संगठनों के नेताओं की सूची तथा चाकू, तलवार, लोहे की रॉड और बम रखने संबंधी नोट्स मिले।

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बचाव पक्ष ने कहा कि अशरफ तीन वर्ष से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है और उसकी गिरफ्तारी विधि के अनुरूप नहीं की गई। यह भी कहा गया कि गिरफ्तारी के आधार ठीक से नहीं बताए गए।

अधिवक्ता ने यह भी दलील दी कि अशरफ वरिष्ठ नागरिक है, विभिन्न बीमारियों से पीड़ित है और कई बार अस्पताल में भर्ती हो चुका है।

बचाव पक्ष ने यह आरोप भी लगाया कि एनआईए ने श्रीनिवासन हत्या मामले में राज्य पुलिस की रिपोर्ट को दबाया और घटना को गलत तरीके से प्रस्तुत किया। तलाशी और बरामदगी को भी अवैध बताया गया क्योंकि यह अशरफ की उपस्थिति में नहीं हुई थी।

साथ ही यह भी कहा गया कि एनआईए मुख्य रूप से सह-आरोपी के मोबाइल से मिले कथित वॉयस क्लिप पर निर्भर है, जिसमें ‘इंडिया 2047’ एजेंडा का उल्लेख है।

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दोनों पक्षों को सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने कहा कि गवाहों के बयान और अन्य सामग्री से प्रथमदृष्टया यह संकेत मिलता है कि आरोपी की भूमिका सक्रिय रही है।

अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और मामला विचारण योग्य है, इसलिए जमानत देने का आधार नहीं बनता।

एनआईए ने वर्ष 2022 में मामला दर्ज किया था। अब तक 65 लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है। 56 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से 50 को जमानत मिल चुकी है।

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